जेवर एयरपोर्ट के नाम पर विकास का ढिंढोरा, हकीकत टूटी और उबड खाबड सडकें

नोएडा ग्रीन इंटरनेशनल जेवर एयरपोर्ट
नोएडा ग्रीन इंटरनेशनल जेवर एयरपोर्ट

सपाट, सुंदर और बेहतरीन सडकों को लेकर यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण फिसड्डी साबित

टूटी और उबड खाबड सडकों की हालत के चलते हुए जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह खुद भी गिर चोटिल तक हो चुके हैं

यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के संबंधित अफसरों का ध्यान इस ओर दिलाया गया, तो मौका मुआयना की खाना पूर्ति कर चलते बने
यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के संबंधित अफसरों का ध्यान इस ओर दिलाया गया, तो मौका मुआयना की खाना पूर्ति कर चलते बने

अफसर टूटी और उबड खाबड सडकांं की हालत को नही सुधारते हैं, तो क्षेत्र के लोग आंदोलन करने के लिए मजबूर हो जाएंगेःएडवोकेट अर्चना सिंह भाटी

मौहम्मद इल्यास-’’दनकौरी’’/यीडा सिटी

टूटी और उबड खाबड सडकों की हालत के चलते हुए जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह खुद भी गिर चोटिल तक हो चुके हैं
टूटी और उबड खाबड सडकों की हालत के चलते हुए जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह खुद भी गिर चोटिल तक हो चुके हैं

नोएडा ग्रीन इंटरनेशनल जेवर एयरपोर्ट बनाए जाने के नाम पर यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण खूब वाहवाही लूट रहा है। यदि विकास की बात की जाए तो उबड खाबड सडकें, झाडियों से अटी हुई ग्रीनरी से ज्यादा कुछ नही है। यह विकास की तस्वीर जेवर विधानसभा क्षेत्र की है। टूटी हुई और उबड खाबड सडकों की कहानी तों यीडा सिटी के शुरू हो जाने से ही शुरू हो जाती है। गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी से लेकर मुशर्दपुर तक बिल्कुल सपाट, सुंदर और बेहतरीन सडकें बनी हुई हैं और जैसी ही यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण का इलाका शुरू होता है, टूटी व उबड खाबड सडकों से स्वागत होता हुआ मिलेगा। यीडा सिटी में मुशर्दपुर से लेकर गलगोटिया यूनिवर्सिटी तक बनाए गए बस शैल्टरों की हालत यह है कि बारिश के मौसम में एक बूंद तक नही रोक पाते हैं। लगातार चू रहे बस शैल्टर अब झाडियों से पूरी तरह घिर चुके हैं और जहां जहरीले जानवरों ने छुपने का आश्रय बना डाला है। दूसरी ओर बात यदि उबड खाबड और टूटी हुई सडकों की जाए तो यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर दनकौर तक इन सडकों की हालत कतई ठीक नही कही जा सकती है। ईर्स्टन पैरीफैरल एक्सप्रेस-वे अंडर पास दनकौर जगनपुर में तो लोकल ऐरिया की आने वाली 60 मीटर चौडी सडक पर गहरे गड्ढे बने हुए, जहां से होकर निकला दुश्वार बना हुआ है और कभी भी कोई बडी दुर्घटना हो सकती हैं। इससे कुछ आगे चलते हैं तो सिकंद्राबाद बाईपास रोड, जो दनकौर बिजलीघर पर मिलता है, हालत बुरी बनी हुई है। इस सिकंद्राबाद बाईपास रोड पर गहरे गड्ढे बने हुए हैं। दनकौर सिलारपुर गोल चक्कर से रबूपुरा- जेवर की ओर जाने वाले 60 मीटर रोड की हालत खराब बनी हुई है। दनकौर रबूपुरा- जेवर रोड पर कई बडे गड्ढे बने हुए हैं, जहां जब वाहन तेज गति से आता है तो गड्ढों की वजह से दुर्घटना होने का पूरा अंदेश बना रहता है। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह का होम टाउन होने नाते रबूपुरा एक महत्वपूर्ण कसबा हैं।

गांव रूस्तमपुर से जिला कोर्ट सूरजपुर में प्रैक्टिस के लिए जाने वाली समाज सेवा के क्षेत्र में अग्रणी एडवोकेट अर्चना सिंह भाटी ने यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अफसरों की कार्यशैली पर रोष जताते
गांव रूस्तमपुर से जिला कोर्ट सूरजपुर में प्रैक्टिस के लिए जाने वाली समाज सेवा के क्षेत्र में अग्रणी एडवोकेट अर्चना सिंह भाटी ने यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अफसरों की कार्यशैली पर रोष जताते

किंतु इन टूटी और उबड खाबड सडकों की हालत के चलते हुए जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह खुद भी गिर चोटिल तक हो चुके हैं। रबूपुरा कसबें के आस के गांवों मिर्जापुर, रूस्तमपुर, पचौकरा, नगंला आदि के अलावा जहांगीरपुर, झाझर, कपना और जेवर की ओर आने जाने वाले लोग इन रास्तों से ही होकर गुजरते हैं। ग्रामीणों और समाज के प्रबुद्ध वर्ग के लोगों द्वारा इन टूटे और उबड खाबड रास्तों को लेकर यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का ध्यान इस ओर दिलाया गया है, मगर इन सबके बावजूद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। गांव रूस्तमपुर से जिला कोर्ट सूरजपुर में प्रैक्टिस के लिए जाने वाली समाज सेवा के क्षेत्र में अग्रणी एडवोकेट अर्चना सिंह भाटी ने यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अफसरों की कार्यशैली पर रोष जताते हुए बताया कि जेवर एयरपोर्ट के नाम पर पूरी दुनिया में विकास का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, किंतु यहां विकास की हकीकत टूटी और उबड खाबड सडकें हैं, जो खुद मुहूं चिढा रही हैं। उन्होंने बताया कि इन खराब रास्तों से आसपास के गांवों मिर्जापुर, निलौनी, रूस्तमपुर और रबूपुरा की ओर जाने वाले लोग परेशानी झेलने के लिए मजबूर बने हुए हैंं। कई बार यहां बडी दुर्घटनाएं तक भी हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के संबंधित अफसरों का ध्यान इस ओर दिलाया गया, तो मौका मुआयना की खाना पूर्ति कर चलते बने, आखिर 3-4 महीने बीत जाने के बाद भी हालत जस के तस बने हुए हैं। उन्होंने चेतावनी के लहजे में कहा कि यदि यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अफसर अपनी कुंभकर्णी नींद से नही जागते हैं और क्षेत्र की इन टूटी और उबड खाबड सडकांं की हालत को नही सुधारते हैं, तो फिर क्षेत्र के लोग आंदोलन तक करने के लिए मजबूर हो जाएंगे

 

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