है,न दीए तले अंधेरा:- किसानों को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में पेयजल भी नहीं मिलता

 

पेयजल नहीं मिलता तो आप सोचिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को अपनी मां समान जमीन देने वाले किसान के हृदय पर क्या बीतती होगी

आर्य सागर खारी

इन दोनों पूरे भारत में भयंकर रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है तापमान 50 डिग्री सेल्सियस को छूने को बेकरार है।अब गर्मी तो गर्मी है उससे बचने का इंतजाम तो इंसानों को ही करना है और उसमें भी विशेष तौर पर नागरिक सेवा काम काज से सरकारी प्राधिकरण आदि में आने वाले लोगों के लिए शीतल पेयजल की व्यवस्था तो प्राधिकरण को ही करनी होगी।
लेकिन खेद आश्चर्य का विषय है ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के 6% किसान आबादी विभाग में न जाने कब से पेयजल देने वाला आरो वाटर कूलर खराब पड़ा है । दूरदराज से प्राधिकरण के 100 से अधिक अधिसूचित गांवों के किसान जिनमें किसान परिवारों की महिला मातृशक्ति भी शामिल होती है जब अपने आबादी भूखंडों के म्यूटेशन ,ट्रांसफर ,लीज डीड आदि के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के तृतीय तल पर किसान आबादी विभाग में जाते हैं तो भयंकर गर्मी से उनका गला सूखा रहता है और ऊपर से जब उन्हें पीने के लिए पेयजल नहीं मिलता तो आप सोचिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को अपनी मां समान जमीन देने वाले किसान के हृदय पर क्या बीतती होगी।

वही 6% आबादी विभाग के मैनेजर बाबू मजे से लस्सी ठंडा मिनरल वाटर पीकर ऐसी में बैठकर ठाठ करते हैं किसान मारा मारा इधर-उधर फिरता है पेयजल की खोज में  कागजी काम ना होने का दुख अलग से।

भारत में गर्मियों के मौसम में जलदान की एक समृद्ध परंपरा रही है। आम आदमी भी सोचता है किसी प्यासे को जल पिलाकर में पुण्य अर्जित कर लूंगा लेकिन प्राधिकरण जिसका हजारों करोड़ का बजट है उसका दिल इतना छोटा हृदय है पेयजल व्यवस्था को लेकर इतना लापरवाह है किसानों के लिए भीषण गर्मी के इस मौसम में उसने ठंडे पेयजल की व्यवस्था भी सुनिश्चित नहीं की है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारियों को इस विषय पर संज्ञान लेकर किसानों के लिए पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

    लेखक:— आर्य सागर खारी, सूचना का अधिकार व सामाजिक कार्यकर्ता है।

 

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