ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में लिए कई बडे फैसले. आइए जानिए

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण
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75 हजार फ्लैट खरीदारों को आशियाना दिलाने के मकसद से अहम फैसला

133वीं बोर्ड बैठक
133वीं बोर्ड बैठक

133वीं बोर्ड बैठक में अमिताभ कांत समिति की सिफारिशें लागू करने पर शासन से जारी शासनादेश को अंगीकृत करने पर मुहर

 

Mohammad Ilyas-Dankauri/Greater Noida

ग्रेटर नोएडा औद्योेगिक विकास आयुक्त व नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड के चेयरमैन मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता मेें आयोजित 133वीं बोर्ड बैठक में अमिताभ कांत समिति की सिफारिशें लागू करने पर शासन से जारी शासनादेश को अंगीकृत करने पर मुहर लग गई है। इससे बिल्डर परियोजनाओं को पूरा करने के लिए शून्यकाल का लाभ, बकाया जमा करने के लिए समयावधि, मोर्टगेज परमिशन, प्रचलित एफएआर को क्रय करने, परियोजना पूरी करने के लिए समय वृद्धि का लाभ मिल सकेगा, जबकि फ्लैट खरीदारों को तीन माह में रजिस्ट्री, अतिरिक्त पैसा नहीं देने समेत कई लाभ मिलेंगे। हालांकि शर्तों का उल्लंघन करने पर बिल्डरों को लाभ नहीं मिल सकेगा। इस बोर्ड बैठक में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार व नोएडा के सीईओ डॉ एम लोकेष समेत तीनों प्राधिकरणों व बोर्ड के अन्य सदस्यों की मौजूदगी में इस प्रस्ताव पर मुहर लग गई है।

दरअसल, नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से शासनादेश जारी किए गए। इन सिफारिशों को लागू करने के लिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 26 दिसंबर को आयोजित बोर्ड बैठक मेें प्रस्ताव रखे गए। फ्लैट खरीदारों को घर दिलाने के मकसद से प्राधिकरण चेयरमैन व बोर्ड के अन्य सभी सदस्यों ने इसे अंगीकृत करने पर तत्काल सहमति दे दी। अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के लिहाज से कई राहत का ऐलान किया गया है। कोरोना महामारी के तहत बिल्डरों को 01 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2022 तक शून्य काल का लाभ दिया जाएगा। ओखला बर्ड सेंचुरी के 10 किलोमीटर के दायरे में एनजीटी के आदेशों के क्रम में 14 अगस्त 2013 से 19 अगस्त 2015 तक जीरो पीरियड का लाभ मिलेगा। यह केस टू केस पर लागू होगा। शून्यकाल का लाभ लेने के बाद बकाया धनराशि का 25 प्रतिशत 60 दिनों के भीतर जमा करना होगा। शेष 75 प्रतिशत पैसा साधारण ब्याज के साथ तीन साल में जमा करना होगा। अब को-डेवलपर को परियोजना पूरी करने की अनुमति मिल सकेगी। प्राधिकरण की बकाया धनराशि देने की जिम्मेदारी दोनों की होगी।

परियोजना की अनुपयुक्त भूमि को आंशिक सरेंडर करने की अनुमति होगी। प्राधिकरण सरेंडर की गई भूमि के लिए पहले से भुगतान की गई राशि को बिल्डर के बकाए के साथ समायोजित करेंगे। प्राधिकरण का बकाया पैसा न देने पर आंशिक भाग का आवंटन रद्द कर सकेगा। बकाया राशि का सत्यापन एक स्वतंत्र सीए करेगा। इस पॉलिसी से लाभान्वित परियोजना के बायर्स से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। सभी नियमों को पूरा करने के बाद प्रचलित दर पर अतिरिक्त एफएआर दिया जा सकेगा। परियोजना को पूरा करने के लिए समय विस्तार शुल्क के बिना अधिकतम तीन वर्ष मिलेगा। कुल ड्यूज के सापेक्ष 25 धनराशि जमा करने पर पीटीएम की अनुमति दी जाएगी। बकाया भुगतान अधिकतम तीन साल में जमा करना होगा। सौ करोड़ रुपये तक के बकाये की राशि एक वर्ष के अंदर जमा की जाएगी। 500 करोड़ रुपये तक की राशि दो वर्षों में तथा इससे अधिक धनराशि तीन वर्ष में अदा करनी होगी। ड्यूज का 25 फीसदी धनराशि जमा करने के लिए 60 दिन का समय मिलेगा। औद्योगिक विकास आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने कहा कि सरकार की इस पहल से खरीदारों को बड़ी राहत मिलेगी। सभी बने हुए फ्लैट की ओसी-सीसी हो जाएगी। फ्लैटों में रहने वाले खरीदारों के नाम जल्द रजिस्ट्री हो जाएगी। इससे खरीदारों को मालिकाना हक मिलेगा।

प्राधिकरणों के ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्टों पर समिति की सिफारिशें लागू होंगी। ग्रुप हाउसिंग में यदि वाणिज्यिक हिस्सा है तो उसमें भी लागू होगा। टाउनशिप डेवलपमेंट प्रोजेक्ट भी इसके दायरे में रहेंगे। ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट अगर एनसीएलटी अथवा कोर्ट में हैं तो वह इस पैकेज का लाभ तभी ले सकते हैं, जब वह अपना केस वापस लेंगे, लेकिन स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट, रिक्रिएशन एंटरटेनमेंट पार्क योजना में शामिल ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्टों पर ये सिफारिशें लागू नहीं होंगी। इसके अलावा व्यावसायिक, संस्थागत और औद्योगिक परियोजनाओं में ये सिफारिशें मान्य नहीं होंगी। बैठक में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ मेधा रूपम, अमनदीप डुली, एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव, अन्नपूर्णा गर्ग, आशुतोष द्विवेदी, एसीईओ सुनील कुमार सिंह, यीडा की एसीईओ श्रुति समेत सभी वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद रहे।

20 हजार वर्ग मीटर तक के औद्योगिक भूखंडों के रेट बढ़ाने पर सहमति

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने 20 हजार वर्ग मीटर तक के भूखंडों की दरों में औसतन 12 फीसदी वृद्धि को मंजूरी दे दी है। 1000 वर्ग मीटर तक के सभी श्रेणी के भूखंडों की कीमत 29238 रुपये प्रति वर्ग मीटर करने पर सहमति बन गई है। इसी तरह 1001 वर्ग मीटर से लेकर 20,000 वर्ग मीटर तक सभी श्रेणी के भूखंडों की कीमत 23975 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दी गई है। शेष आकार वाले भूखंडों की श्रेणी और कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

ग्रुप हाउसिंग प्रोेजेक्टों में विजिटर्स पार्किंग अनिवार्य

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्टों में विजिटर्स पार्किंग 5% अनिवार्य करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। एकल भवनों में भी सिंगल पार्किंग जरूरी है। इससे सोसाइटियों में विजिटर्स की पार्किंग को लेकर होने वाले विवाद हल हो जाएंगे। यह व्यवस्था नए और पुराने, सभी प्रोजेक्टों पर लागू होंगे। इस प्रावधान पर जन सामान्य से आपत्ति/सुझाव मांगे जाएंगे। उसके बाद अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

औद्योगिक, आईटी व संस्थागत इकाइयों को बोर्ड से राहत

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने निवेश व रोजगार को ध्यान में रखते हुए अब तक कंप्लीशन व फंक्शनल सर्टिफिकेट न ले पाने वाली औद्योगिक, आईटी व आईटीईएस को बडी राहत दे दी है। इन इकाइयों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट व फंक्शनल सर्टिफिकेट प्राप्त करनेे के लिए 31 दिसंबर 2024 तक का समय दे दिया है। इसका लाभ लेने के लिए इन इकाइयों को निर्धारित शुल्क देना होगा। बोर्ड ने संस्थागत इकाइयों को भी बड़ी राहत दे दी है। अब तक पंजीकरण न करा पाने वाली इकाइयों को सशुल्क 31 दिसंबर 2024 तक का समय दे दिया है। इसी तरह मानचित्र स्वीकृति व कंप्लीशन के लिए सशुल्क 31 दिसंबर 2025 तक का समय दिया गया है।

बकाया जल मूल्य पर ओटीएस योजना

ग्रेेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने पानी के बकायेदारों को भी बड़ी राहत दे दी है। बोर्ड ने 31 मार्च 2024 तक की लंबित देय जल मूल्य धनराशि पर कार्यालय आदेश जारी होने की तिथि से 31 जनवरी 2024 तक डिफॉल्ट धनराशि जमा करने पर कुल ब्याज में 40 फीसदी छूट मिलेगी। इसी तरह 01 फरवरी से 29 फरवरी तक जमा करने पर 30 फीसदी और एक मार्च से 31 मार्च 2024 तक जमा करने पर 20 फीसदी की छूट मिलेगी। प्राधिकरण का पानी के बकायेदारों पर करीब 34 करोड़ रुपये बकाया हैें।

सभी सेक्टरों में गंगाजल पहुंचाने के निर्देश

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने गंगाजल परियोजना की भी समीक्षा की। चेयरमैन ने इस परियोजना पर तेजी से काम करते हुए सभी सेक्टरों तक शीघ्र गंगाजल पहुंचाने के निर्देश दिए। अब तक करीब 40 सेक्टरों में गंगाजल पहुंच चुका है।

आवसीय योजना 2010 के 231 आवंटियों को राहत

सेक्टर जीटा टू में आरपीएस 02 आवसीय योजना 2010 के 231 आवंटियों की तरफ से जमा धनराशि को वापस किए जाने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। लंबे समय से इंतजार कर रहे इस योजना के आवंटियों को बड़ी राहत मिल जाएगी।

आवासीय संपत्तियों के कार्यपूर्ति प्रमाणपत्रों के नियमों मेें ढील

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने एकल आवासीय भवनों के लिए कंपनशनेट ग्राउंड पर कार्यपूर्ति प्रमाणपत्रों के नियमों मेें राहत देने का निर्णय लिया है। मूल आवंटी की मृत्यु होने पर उनके वारिसानों ने कार्यपूर्ति की प्रक्रिया को पूरी नहीं की। इसी तरह मूल आवंटी की तरफ से कार्यपूर्ति के लिए आवेदन करने के पश्चात गंभीर बीमारी होने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। सेना या फिर अर्द्धसैनिक बलों के कार्यरत अधिकारी या कर्मचारी संवेदनशील जगहों पर ड्यूटी के चलते कार्यपूर्ति प्रमाणपत्र नहीं ले सके। ऐसे सभी प्रकरणों में आवेदकों से आवेदन की तिथि के बाद समय विस्तरण सर्टिफिकेट नहीं लिया जाएगा।

तीनों प्राधिकरणों की एसओपी जल्द

नोएडा-ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण की एसओपी जल्द बनाने की योजना है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने मैसर्स सार्क एसोसिएट्स को तीनों प्राधिकरणों की नीतियों, नियम और विनिमय में समरूपता लाने की जिम्मेदारी दी है। इससे आवंटियों को बहुत सुविधा हो जाएगी।

प्राधिकरण व सीआरआरआई के मध्य एमओयू जल्द

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बीच एमओयू करने के लिए सहमति दे दी है। सीआरआरआई ग्रेटर नोएडा में आधुनिक तकनीक के जरिए सड़कों के निर्माण में और पारदर्शिता तथा गुणवत्ता बढ़ाने, वेस्ट मैटेरियल से बनी टाइल्स का फुटपाथ बनवाने, सड़कों का थर्ड पार्टी के रूप में असिस्मेंट करने, ट्रैफिक की प्लानिंग आदि में प्राधिकरण का सहयोग करेगा।

 किसानों को 10 फीसदी विकसित भूखंड देने पर बोर्ड की सहमति

वेंडिंग जोन में 33 फीसदी आरक्षण व 296 लीज बैक के प्रकरणों को भी मंजूरी

 गेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने बैठक में किसानों के लिए राहत का पिटारा खोल दिया है। प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट व उच्च न्यायालयों के आदेशों से संबंधित अधिसूचनाओं के समस्त किसानों को 10 फीसदी विकसित आबादी भूखंड भी दिए जाने के प्रस्ताव पर बोर्ड ने सहमति दे दी है। अब इसे षासन के पास भेजा जाएगा। वहां से अनुमोदन के उपरांत इसे लागू किया जाएगा। किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार की तरफ से चेयरमैन मनोज कुमार सिंह के समक्ष इस प्रस्ताव को रखा गया, जिस पर चेयरमैन ने इसे तत्काल स्वीकार कर लिया। अब इस पर अनुमोदन के लिए षासन को भेजा जाएगा। वहां से अप्रूवल के बाद किसानों को अधिग्रहित जमीन का 10 फीसदी (अधिकतम 2500 वर्ग मीटर) मिल सकेगा। इससे लंबे समय से किसानों की लंबित मांग पूरी हो जाएगी। पात्र किसानों को आरक्षण पत्र जारी किए जाएंगे। विकसित भूखंड का आवंटन शीघ्र भूमि अर्जित कर दिया जाएगा। अगर किसी पात्र किसान ने अवैध कब्जा कर रखा है तो उसे स्वेच्छा से अवैध कब्जा हटा लेने के बाद ही भूमि का आवंटन किया जाएगा। किसानों को शपथ पत्र देना होगा कि उनके पास आरक्षित या आवंटित भूखंड 2500 वर्ग मीटर से अधिक नहीं है। इस बाबत किसान की तरफ से अगर कोई याचिका या फिर विषेष अनुज्ञा अपील की गई है तो उसे वापस लिया जाएगा। बोर्ड ने इस प्रस्ताव को शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं। किसानों की दूसरी मांग पर प्राधिकरण बोर्ड ने आपसी सहमति से भूमि विक्रय करने वाले किसानों को नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत परियोजना प्रभावित मानकर उन्हें भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुर्नव्यवस्थापन के हिसाब से उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 (नये भूमि अधिग्रहण कानून) के तहत लाभ दिए जाने पर सकारात्मक फैसले के लिए शासन के पास भेजने पर हरी झंडी दे दी है। किसानों की तीसरी मांग के रूप में प्राधिकरण बोर्ड ने वेंडिंग जोन में किसानों को 33 फीसदी आरक्षण के प्रस्ताव को भी स्वीकार कर लिया है। इसके अलावा किसानों की ही मांग पर प्राधिकरण बोर्ड ने लीज बैक के 533 में से शासन से अनुमोदित 296 पात्र किसानों को लीज बैक करने के प्रस्ताव पर सहमति दे दी है। जल्द ही पात्र किसान लीज बैक करा सकेंगे। इन फैसलों से बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिल सकेगा।

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