
कोविड-19 महामारी के दौरान अपने 102 ट्रॉफियाँ बेचकर 4.3 लाख पीएम केयर्स फंड में दान किए

मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”/ग्रेटर नोएडा
जब हम एक खिलाड़ी की सफलता के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में पदक, ट्रॉफियाँ और टूर्नामेंट की चमक-दमक आती है। लेकिन कुछ खिलाड़ी अपनी उपलब्धियों से आगे बढ़कर समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं। ग्रेटर नोएडा के अर्जुन भाटी ऐसे ही एक असाधारण युवा गोल्फर हैं, जिन्होंने न केवल खेल की दुनिया में भारत का नाम रोशन किया बल्कि कोविड-19 महामारी के दौरान अपने 102 ट्रॉफियाँ बेचकर ₹4.3 लाख पीएम केयर्स फंड में दान किए।
उनकी इस निस्वार्थ सेवा और असाधारण उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित किया है। यह कहानी सिर्फ एक पुरस्कार की नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और समाज के प्रति समर्पण की कहानी है।

गोल्फ की ओर पहला कदम: माँ-बाप का सपना, बच्चे की लगन
ग्रेटर नोएडा के मांयचा गाँव में जन्मे अर्जुन भाटी का बचपन आम बच्चों की तरह ही था, लेकिन उनकी रूचि बचपन से ही खेलों में थी। उनके माता-पिता ने उनकी इस रुचि को पहचाना और उन्हें गोल्फ में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। गोल्फ, जो आमतौर पर एक महंगा खेल माना जाता है, अर्जुन के परिवार के लिए आसान नहीं था, लेकिन उनके माता-पिता ने हर संभव प्रयास कर उन्हें इस खेल में आगे बढ़ाया।
उन्होंने महज 8 साल की उम्र में गोल्फ खेलना शुरू किया और जल्द ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें भारत का सबसे कम उम्र का जूनियर गोल्फ चैम्पियन बना दिया।

कोविड-19 महामारी में अर्जुन भाटी की समाजसेवा
जब दुनिया महामारी से जूझ रही थी, तब अर्जुन भाटी ने एक ऐसा निर्णय लिया जो उनकी परिपक्वता और समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने अपनी अब तक की जीती हुई 102 ट्रॉफियाँ बेच दीं और उससे मिली ₹4.3 लाख की राशि को पीएम केयर्स फंड में दान कर दिया।

जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने यह निर्णय क्यों लिया, तो उन्होंने कहा,
“मेरी ट्रॉफियाँ मेरे लिए बहुत कीमती थीं, लेकिन जब मैंने देखा कि देशभर में लोग संकट से जूझ रहे हैं, तो लगा कि इनसे ज्यादा कीमती लोगों की जान बचाना है। ट्रॉफियाँ फिर से जीती जा सकती हैं, लेकिन किसी की जान नहीं।”उनके इस निर्णय की पूरे देश में सराहना हुई और वे युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए।

खेल जगत में अर्जुन भाटी की चमकदार उपलब्धियाँ
अर्जुन भाटी ने सिर्फ समाजसेवा ही नहीं, बल्कि अपने खेल से भी भारत का नाम ऊँचा किया है। उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में जीत दर्ज की, जिनमें शामिल हैं:
✅ जूनियर वर्ल्ड गोल्फ चैंपियनशिप (यूएसए) – स्वर्ण पदक विजेता
✅ अंतरराष्ट्रीय गोल्फ टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व
✅ नेशनल गोल्फ चैंपियनशिप में कई बार प्रथम स्थान
✅ भारतीय ओलंपिक टीम में चयनित होने की प्रक्रिया में शामिल
उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें भारत के उभरते हुए गोल्फ खिलाड़ियों की पहली पंक्ति में खड़ा कर दिया है।
राष्ट्रीय युवा पुरस्कार: समाज और खेल का अनोखा संगम
राष्ट्रीय युवा पुरस्कार भारत सरकार द्वारा उन युवाओं को दिया जाता है जो अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ-साथ समाज के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। अर्जुन भाटी इस पुरस्कार के सबसे उपयुक्त विजेताओं में से एक हैं।

पुरस्कार मिलने पर अर्जुन ने कहा,
“यह पुरस्कार सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि हर उस युवा का है जो अपने सपनों के साथ-साथ समाज की भलाई के लिए भी कुछ करना चाहता है। यह मुझे ओलंपिक में स्वर्ण पदक लाने की दिशा में और मेहनत करने की प्रेरणा देता है।”
भविष्य की योजनाएँ: ओलंपिक स्वर्ण की ओर
अब अर्जुन भाटी की नजरें ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने पर टिकी हैं। वे दिन-रात अपनी ट्रेनिंग पर ध्यान दे रहे हैं और आने वाले एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक क्वालिफायर्स में अपनी जगह पक्की करने की तैयारी कर रहे हैं।
उनकी यात्रा यह साबित करती है कि जब हौसले बुलंद हों, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। अर्जुन भाटी आज सिर्फ एक गोल्फ खिलाड़ी नहीं, बल्कि देश के युवाओं के लिए मेहनत, समर्पण और समाजसेवा का प्रतीक बन चुके हैं।

अर्जुन भाटी की कहानी हर युवा के लिए एक प्रेरणा
अर्जुन भाटी की कहानी हमें सिखाती है कि खेल सिर्फ जीतने का नाम नहीं, बल्कि कुछ देने का भी नाम है। उनकी समाजसेवा, खेल में उपलब्धियाँ और मेहनत हर युवा को यह संदेश देती हैं कि यदि जुनून और समर्पण हो, तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है।
अर्जुन भाटी जैसे युवा ही भारत का भविष्य हैं, जो न केवल अपने खेल से देश का नाम रोशन कर रहे हैं, बल्कि समाज के लिए भी एक मिसाल पेश कर रहे हैं। अब पूरा देश उनकी ओलंपिक यात्रा का गवाह बनने के लिए उत्साहित है।
क्या अर्जुन भाटी भारत के लिए ओलंपिक गोल्ड जीत पाएंगे? यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन उनकी कहानी पहले ही हर भारतीय के दिल में जगह बना चुकी है।