
विशेष रिपोर्ट | जन-जागरण से संगठन सशक्तिकरण तक
चुहड़पुर में अखिल भारतीय गुर्जर महासभा (1908) की ऐतिहासिक बैठक, समाज उत्थान की नई रणनीति पर व्यापक मंथन

मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”/ ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के चुहड़पुर गांव में अखिल भारतीय गुर्जर महासभा (1908) द्वारा आयोजित जन-जागृति बैठक सामाजिक एकता, शिक्षा जागरण और संगठन विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई। यह आयोजन केवल औपचारिक बैठक नहीं था, बल्कि समाज के भविष्य की रूपरेखा तय करने का गंभीर प्रयास था, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों, युवाओं और पदाधिकारियों की सक्रिय भागीदारी रही।

बैठक की अध्यक्षता जयपाल भाटी ने की, जबकि संचालन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सविंदर भाटी और प्रवीन भारतीय ने संयुक्त रूप से किया। मुख्य वक्ता के रूप में महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री हरिश्चंद्र भाटी उपस्थित रहे। मंच पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के.पी. कसाना, जयप्रकाश विकल तथा गौतमबुद्ध नगर जिला अध्यक्ष अशोक भाटी की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।

शिक्षा और संगठन को बनाया प्राथमिक एजेंडा
बैठक में वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक उन्नति शिक्षा, संगठन और आर्थिक आत्मनिर्भरता से ही संभव है। समाज के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं, तकनीकी शिक्षा, स्टार्टअप और स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने की रणनीति पर चर्चा की गई।
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि गांव स्तर पर शिक्षा प्रकोष्ठ बनाए जाएं, जहां छात्र-छात्राओं को मार्गदर्शन, कोचिंग और करियर काउंसलिंग उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही समाज के सफल व्यक्तियों को मेंटर के रूप में जोड़ने का प्रस्ताव भी रखा गया।

गौरवशाली इतिहास और आत्मसम्मान का संदेश
राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिश्चंद्र भाटी ने अपने संबोधन में कहा कि गुर्जर समाज का इतिहास वीरता, नेतृत्व और बलिदान से भरा हुआ है। उन्होंने समाज को अपने अतीत से प्रेरणा लेकर भविष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने उत्साहपूर्ण शब्दों में कहा—
“तुम मेरा साथ दो, मैं तुम्हारा परचम लहराऊंगा।”
इस उद्बोधन ने उपस्थित लोगों में नई ऊर्जा का संचार किया और सभा स्थल तालियों की गूंज से भर उठा।

युवा नेतृत्व को मिली अहम जिम्मेदारी
कार्यक्रम के दौरान पंकज रोसा को युवा राष्ट्रीय शिक्षा संयोजक नियुक्त किया गया। साथ ही उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर, शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। इस निर्णय को समाज में शिक्षा आंदोलन को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग के माध्यम से छात्रवृत्ति सहायता, करियर मार्गदर्शन शिविर और प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कार्यकारिणी विस्तार और संगठनात्मक मजबूती
हाल ही में ग्रेटर नोएडा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में महासभा की कार्यकारिणी का विस्तार किया गया था।

नई जिम्मेदारियों के तहत:
सविंदर भाटी, के.पी. कसाना, जयप्रकाश विकल को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
सुनील भाटी को प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष
अशोक भाटी को जिला अध्यक्ष
नामित भाटी को नेशनल कोऑर्डिनेटर
सहित कई पदाधिकारियों को महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे गए। संगठन को गांव-गांव तक मजबूत करने और नई सदस्यता अभियान चलाने की रणनीति भी साझा की गई।

स्वागत समारोहों से दिखा जनसमर्थन
16 फरवरी 2026 को ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के चूहडपुर खादर गांव में धीरज प्रधान के आवास पर भव्य स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके अलावा श्यामवीर भाटी के आवास पर भी स्वागत समारोह हुआ।
इससे पहले 15 फरवरी 2026 को चीरसी गांव तथा नव-नियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सविंदर भाटी के मुर्शदपुर स्थित गांव में भी भव्य स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इन आयोजनों में समाज के युवाओं और बुजुर्गों की उल्लेखनीय भागीदारी रही, जो संगठन के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत है।

27 फरवरी को ऐतिहासिक आयोजन का ऐलान
बैठक के समापन पर जिला अध्यक्ष अशोक भाटी ने सभी से 27 फरवरी को अखिल भारतीय गुर्जर संस्कृति शोध संस्थान “गुर्जर भवन” में आयोजित विजय सिंह पथिक जयंती कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को अपने इतिहास से जोड़ते हैं और आने वाली पीढ़ियों में स्वाभिमान की भावना जागृत करते हैं।

व्यापक जन भागीदारी
कार्यक्रम में जितेंद्र विकल, नामित भाटी, दीपक भाटी, प्रमोद भाटी, महरचंद प्रधान, विजयपाल शास्त्री, देशपाल भाटी, नरेंद्र भाटी, शशांक भाटी, जयराज भाटी, मास्टर सूबेराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का पगड़ी बांधकर और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया, जो सामाजिक एकता और परंपरागत आदर का प्रतीक रहा।

एकजुटता से विकास की ओर
चुहड़पुर की यह जन-जागृति बैठक समाज को संगठित कर शिक्षा, जागरूकता, नेतृत्व विकास और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ाने का मजबूत संदेश देकर संपन्न हुई। महासभा (1908) की सक्रियता और गांव स्तर पर हो रहे स्वागत समारोह इस बात का संकेत हैं कि समाज अब संगठित रूप से अपने अधिकारों, सम्मान और प्रगति के लिए आगे बढ़ने को तैयार है।
यह आयोजन भविष्य में व्यापक सामाजिक आंदोलन का आधार बन सकता है, जहां शिक्षा और संगठन के बल पर समाज नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर होगा।