
**जेवर की सियासत में जाट वोटबैंक पर टिक गई निगाहें**

मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”/ गौतमबुद्धनगर
गौतमबुद्धनगर की जेवर विधानसभा में सियासत की जमीन लगातार गर्म होती जा रही है। राष्ट्रीय लोक दल के मुखिया व केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी अब उसी इलाके में खड़े हैं, जहां 2011 के भट्टा–पारसौल किसान आंदोलन की आग ने पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति को हिला दिया था।
आज, एक बार फिर उसी संघर्ष की छाया जेवर की राजनीति में लौट रही है — और किसान अपने पुराने जख्मों पर मरहम की उम्मीदों के साथ जयंत चौधरी की ओर देख रहे हैं।

इंडोर स्टेडियम शिलान्यास में उठी पुरानी मांगें — “मुकदमे वापस हों”
शनिवार, 29 नवंबर 2025 को दनकौर स्थित किसान आदर्श इंटर कॉलेज में
2 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इंडोर स्टेडियम का शिलान्यास करते हुए
जयंत चौधरी के सामने भट्टा–पारसौल के किसान एक बार फिर अपनी पुरानी मांगों के साथ पहुंचे।
सरपंच पवन चौधरी, हितेंद्र चौधरी (भट्टा) और यतेन्द्र चौधरी (भट्टा) ने मंच पर ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा—
भट्टा–पारसौल किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे बिना शर्त वापस लिए जाएं
पारसौल स्थित किसान इंटर कॉलेज में खेल सुविधाएं विकसित की जाएं
युवाओं के लिए कौशल विकास केंद्र या आईटीआई स्थापित हो ताकि यमुना प्राधिकरण के औद्योगिक क्षेत्र में उन्हें रोजगार मिल सके
किसानों का कहना था कि यदि दनकौर के किसान आदर्श इंटर कॉलेज को इतनी बड़ी सौगात मिल सकती है,
तो पारसौल के किसान इंटर कॉलेज को भी उसी तर्ज पर सुविधाएं मिलनी चाहिए।

जेवर में बड़ी संख्या में जाट आबादी — RLD के लिए चुनौती भी, अवसर भी
पश्चिमी यूपी में RLD का पारंपरिक वोट बैंक जाट बिरादरी मानी जाती है।
जेवर विधानसभा में
भट्टा, पारसौल सहित कई गांव राजनीति की दृष्टि से अहम हैं।
ऐसे में किसानों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि—
क्या जयंत चौधरी जेवर में अपने वोटबैंक को मजबूत करने के लिए भट्टा–पारसौल के किसानों को ‘बड़ी सौगात’ देंगे?
दनकौर का किसान आदर्श इंटर कॉलेज गुर्जर समाज की स्थापना है,
जबकि पारसौल का किसान इंटर कॉलेज जाट समाज की।
प्रश्न स्पष्ट है—
दनकौर को मिला 2 करोड़ का स्टेडियम क्या जयंत पारसौल को भी देंगे?

किसानों की दो-टूक— “अब भाजपा सरकार पर दबाव बनाएँ जयंत”
कार्यक्रम के बाद मीडिया से बात करते हुए
जयंत चौधरी ने मुकदमों पर सिर्फ इतना कहा—
“मुकदमे वापस लेने की एक कानूनी प्रक्रिया होती है, हम प्रयास करेंगे।”
लेकिन किसानों की प्रतिक्रिया उससे कहीं ज़्यादा तीखी थी।
किसानों ने साफ कहा—
जयंत चौधरी इस समय भाजपा सरकार में शामिल हैं, इसलिए
नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए मुकदमे तुरंत वापस कराने की पहल करें
अगर RLD नेता ही किसानों की लड़ाई नहीं लड़ पाए,
तो जाट समाज में गलत संदेश जाएगा
किसानों का यह भी कहना था कि—
“मुकदमे अभी वापस नहीं हुए, तो जाट बिरादरी भी यह मान लेगी कि
जयंत चौधरी भी बाकी नेताओं की तरह सिर्फ सियासत कर रहे हैं।”

**अब सबसे बड़ा सवाल—
क्या पारसौल को भी दनकौर जैसी सौगात मिलेगी?**
इंडोर स्टेडियम का शिलान्यास तो हो गया,
लेकिन जेवर की सियासत का असली सवाल अभी भी खुला है—
क्या जयंत चौधरी पारसौल के किसान इंटर कॉलेज को भी खेल सुविधाएँ, कौशल विकास केंद्र और नई परियोजनाओं का तोहफा देंगे?

और सबसे अहम—
क्या भट्टा–पारसौल आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वास्तव में वापस होंगे?
क्योंकि जेवर विधानसभा में RLD का भविष्य
इन्हीं सवालों पर टिका दिखाई दे रहा है।