इस्लामी नववर्ष पर बदला गया काबा शरीफ का गिलाफ़ (किस्वा), सोने-चांदी से जड़ी 1415 किलो वजनी रेशमी चादर ने ओढ़ा पवित्र स्थल


विजन लाइव/ मक्का ( सऊदी अरब)
इस्लामी नववर्ष 1447 हिजरी की पहली तारीख (1 मुहर्रम) के पवित्र अवसर पर आज मक्का स्थित पवित्र काबा शरीफ को नया किस्वा (गिलाफ़) ओढ़ाया गया। यह ऐतिहासिक और आध्यात्मिक परंपरा हर साल सऊदी अरब द्वारा अत्यंत श्रद्धा, भव्यता और कारीगरी के साथ निभाई जाती है।

गिलाफ़-ए-काबा, जो काले रंग की सुंदर रेशमी चादर होती है, को हर साल बदला जाता है और इसमें कुरआन की आयतें सोने और चांदी के धागों से बारीकी से कढ़ी जाती हैं।


🔶 किस्वा 2025 की प्रमुख विशेषताएं:

🔸 कुल वजन: 1415 किलोग्राम

🔸 कुल ऊँचाई: 14 मीटर

🔸 कुल पैनल: 47 सिल्क पैनल (प्रत्येक 98 सेंटीमीटर चौड़े और 14 मीटर लंबे)

🔸 कुल रेशम इस्तेमाल: 825 किलोग्राम

🔸 सोने से कढ़ाई: 120 किलोग्राम धागे

🔸 चांदी से कढ़ाई: 60 किलोग्राम शुद्ध चांदी

🔸 अंदर की परत: 410 किलोग्राम कॉटन


📜 कुरआनी आयतें और डिजाइन:

किस्वा पर 68 पवित्र कुरआनी आयतें टुलुथ लिपि में उकेरी गई हैं।

किस्वा में शामिल होते हैं:
▪ हिज़ाम (बेल्ट) – चारों ओर गोल्डन पट्टी जिसमें आयतें कढ़ी जाती हैं
▪ सितारा (दरवाजे पर सोने का आवरण)
▪ मिज़ाब (छज्जा) और रुखने यमानी पर विशेष डिज़ाइन

दरवाजे का सितारा: सोने के धागों से सजाया गया विशेष पैनल, सबसे आकर्षक हिस्सा।



👳‍♂️ निर्माण प्रक्रिया:

किस्वा को मक्का स्थित “किस्वा फैक्ट्री” में तैयार किया गया।

इसमें 154 कुशल कारीगरों, इंजीनियरों और तकनीशियनों ने भाग लिया।

निर्माण प्रक्रिया में करीब 11 महीने लगते हैं।

इसमें उच्च गुणवत्ता वाले काले रेशम, शुद्ध सोने और चांदी के तारों का इस्तेमाल होता है।




📅 परंपरा में बदलाव:

पहले किस्वा का परिवर्तन हज के दौरान 9 ज़िल-हिज्जा (अराफात का दिन) पर किया जाता था।

अब 2022 से यह परंपरा इस्लामी नववर्ष की पहली रात (1 मुहर्रम) को स्थानांतरित कर दी गई है, जिससे इसे एक नयी धार्मिक शुरुआत से जोड़ा गया है।



🌍 वैश्विक संदेश:

यह परंपरा न केवल इस्लामी श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि सऊदी अरब की सांस्कृतिक विरासत, इस्लामी कारीगरी और आधुनिक प्रबंधन का अद्भुत मेल है। हर साल दुनियाभर के मुस्लिम इस ऐतिहासिक क्षण को लाइव देखते हैं और अपनी आस्था के केंद्र काबा शरीफ से जुड़ाव महसूस करते हैं।



🕊️ पुराना गिलाफ़:

पुराने गिलाफ को सम्मानपूर्वक उतारा जाता है।

उसे साफ कर विभिन्न इस्लामी देशों, संग्रहालयों और गणमान्य मुस्लिम हस्तियों को उपहार स्वरूप भेजा जाता है।


🟡 Vision Live News – अंतरराष्ट्रीय डेस्क

 

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