शहीद विजय सिंह पथिक जयंती की पूर्व संध्या पर विचार गोष्ठी व पुस्तक विमोचन समारोह

शहीद विजय सिंह पथिक के द्वारा लिखित पुस्तक “भारतीय रियासतों की कहानी” का हिंदी अनुवाद संस्करण का विमोचन भी किया गया

मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी” / ग्रेटर नोएडा 

1857 की क्रांति के महानायक शहीद विजय सिंह पथिक की 144 वीं जयंती की पूर्व संध्या पर ग्रेटर नोएडा स्थित अखिल भारतीय गुर्जर संस्कृति शोध संस्थान में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसके साथ ही शहीद विजय सिंह पथिक के द्वारा लिखित पुस्तक “भारतीय रियासतों की कहानी” का हिंदी अनुवाद संस्करण का विमोचन भी किया गया। पुस्तक “भारतीय रियासतों की कहानी” के हिंदी अनुवादक नरेंद्र नागर ने शहीद विजय सिंह पथिक के जीवन के संघर्षों पर प्रकाश डाला। पूर्व मंत्री चौधरी हरिश्चंद्र भाटी ने शहीद विजय सिंह पथिक के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बुलंदशहर के गुठावली गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे भूप सिंह राठी अंग्रेजों को धूल चटाने के मिशन में शहीद विजय सिंह पथिक हो गए थे। उन्होंने कहा कि शहीद विजय सिंह पथिक जैसे अमर क्रांतिवीर भी गौरवमयी में गुर्जर जाति में ही जन्मे थे। सम्राट मिहिर भोज से लेकर कनिष्क तक और नागभट्ट फैला हुआ है। गुर्जर कौम विदेशी आक्रांताओं से जमकर कर लोहा लिया था। अंग्रेजी शासन के समय भी चूल हिलाने का काम गुर्जर जाति के वीरों ने किया। इनमें शहीद धन सिंह कोतवाल और शहीद विजय सिंह इतिहास की घोर उपेक्षा की गई है, जिसे अब पहचान नहीं होगा। गौतमबुद्धनगर के पूर्व जिला पंचायत चैयरमैन  वीरेंद्र डाढा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की बुलंदशहर जिले में जन्मे शहीद विजय सिंह पथिक ने राजस्थान को अपनी कर्म भूमि बनाया और किसने की लड़ाई लड़ते हुए अंग्रेजी सरकार को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया था। किसानों पर थोपे गए कई तरह के नाजायज टैक्सों से छुटकारा मिला और किसानों का यह आंदोलन इतिहास में बिजोलिया आंदोलन के रूप में प्रसिद्ध हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि ऐसे अमर क्रांति वीर शहीद विजय सिंह पथिक को भारत रत्न की उपाधि से विभूषित करना ही चाहिए।

विजय सिंह पथिक शोध संस्थान के अध्यक्ष राजकुमार भाटी ने कहा कि शहीद विजय सिंह पथिक एक बड़े क्रांतिवीर के साथ-साथ साहित्य में गहरी रुचि रहने रखने वाले साहित्यकार के साथ एक कवि और पत्रकार भी थे जिन्होंने कई समाचार पत्रों का भी संपादन किया था। ऐसी इतिहास पुरुष शहीद विजय सिंह पथिक के नाम पर एक यूनिवर्सिटी बनाए जाने की नितांत आवश्यकता है। सरकार को इस दिशा में जरूर चिंतन करना चाहिए। अखिल भारतीय गुर्जर संस्कृति शोध संस्थान कार्यकारिणी सदस्य व शहीद धन सिंह कोतवाल ट्रस्ट मेरठ के निदेशक सुखबीर सिंह आर्य ने कहा कि शहीद धन सिंह कोतवाल और शहीद विजय सिंह पथिक क्रांतिवीरों की शौर्य गाथाओं को भुलाया नहीं जा सकता है। सरकार को चाहिए कि ऐसे अमर शहीद विजय सिंह पथिक को भारत रत्न देते हुए प्रमुख मार्गों और चौराहों के नाम उनके नाम पर रखे जाने चाहिए। पूर्व महानिदेशक संस्कृति निदेशालय भारत सरकार डॉ शीतल प्रसाद, भारतीय गुर्जर परिषद के अध्यक्ष जगदीश सिंह लोहिया, गौतम बुद्ध नगर दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमेन्द्र भाटी, वरिष्ठ अधिवक्ता संतराम भाटी आदि वक्ताओं ने भी शहीद विजय सिंह पथिक के जीवन पर प्रकाश डाला। विचार गोष्ठी कार्यक्रम की अध्यक्षता रिटायर्ड डीएसपी धर्मचंद ने की और संचालन अखिल भारतीय गुर्जर संस्कृति शोध संस्थान के सचिव व गौतम बुध नगर दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष योगेंद्र भाटी एडवोकेट ने किया।

इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामशरण नगर एडवोकेट, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष हरेंद्र भाटी उर्फ बबल भाटी, भारतीय किसान यूनियन( भानु) के जिला मीडिया प्रभारी सुभाष भाटी गढ़ी( शहदरा) अखिल भारतीय गुर्जर संस्कृति शोध संस्थान के सह सचिव  जयकरण भाटी,  कोषाध्यक्ष रूपचंद्र मुनीम  और विजेंद्र सिंह आर्य, कमल सिंह आर्य, बेगराज गुर्जर,  अशोक भाटी यशवीर गुर्जर, राजपाल भाटी ,राजेश्वर भाटी, शिवराज सिंह चौहान, नामित भाटी ,चौधरी प्रवीण भारतीय आदि गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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