देश की प्रगति का आधार मातृ-शिशु की उचित देखभाल

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर फोर्टिस हाॅस्पिटल  ग्रेटर नोएडा की  खास पहल

मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी” / ग्रेटर नोएडा

किसी भी देश के आगे बढ़ने का आधार वहां की स्वास्थ्य सुविधाएं होती हैं। खासकर मातृ और शिशु का स्वास्थ्य व उनकी देखभाल। विश्व स्वास्थ्य दिवस 2025 पर, माँ व नवजात शिशु को गुणवत्तापूर्ण और जीवनरक्षक देखभाल प्रदान करने पर जोर दिया जा रहा है। वर्तमान में चिकित्सा तकनीक और स्वास्थ्य सुविधाओं में प्रगति के बावजूद, मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य देश ही नहीं दुनियाभर में चिंता का विषय बना हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक प्रतिदिन लगभग 800 महिलाएँ गर्भावस्था दौरान सही इलाज न मिल पाने के कारण अपनी जान गंवाती हैं। वहीं 24 लाख नवजात पहले एक महीने में ही दम तोड़ देते हैं। इस वर्ष, स्वास्थ्य विशेषज्ञ मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को रोकने के लिए समय पर प्रसवपूर्व देखभाल, बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ और जनजागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।

इस संबंध में फोर्टिस हाॅस्पिटल ग्रेटर नोएडा की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मेघना हँसमुखलाल पंचाल ने कहा कि मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक मौलिक अधिकार होना चाहिए। चिकित्सा तकनीक में प्रगति, समय पर प्रसवपूर्व हस्तक्षेप और प्रशिक्षित जन्म देखभाल से हम मातृ और नवजात मृत्यु दर को काफी हद तक कम कर सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित कर सकते हैं।

फोर्टिस ला फेम की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. राका गुलेरिया ने प्रसवोत्तर देखभाल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि माँ और नवजात दोनों के लिए प्रसव के बाद की संपूर्ण देखभाल सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। मातृ स्वास्थ्य की निगरानी, शिशु की वृद्धि एवं टीकाकरण का आकलन, और परिवारों को स्वच्छता एवं पोषण के बारे में शिक्षित करना दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बना सकता है।

महिलाओं में प्रेगनेंसी को लेकर भ्रांतियों के संबंध में डॉ. डिंपल बोरदोलोई, विभागाध्यक्ष लेप्रोस्कोपिक स्त्री रोग, प्रसूति और कॉस्मेटिक स्त्री रोग, मैश मानस हॉस्पिटल, नोएडा ने बताया कि कई लोग सोचते हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान अधिक भोजन करना चाहिए। सच तो यह कि इस दौरान पौष्टिक भोजन अधिक जरूरी होता है। गर्भावस्था के दौरान 300-350 अतिरिक्त कैलोरी की ही जरूरत होती है।

इसके साथ ही साथ ही कुछ लोगों को लगता है कि अल्ट्रासाउंड जांच मां और बच्चे के लिए हानिकारक होती है, जबकि अभी तक कोई शोध यह पुष्टि नहीं करता कि अल्ट्रासाउंड हानिकारक है। इतना ही नहीं गर्भावस्था के दौरान व्यायाम को हानिकारक माना जाता है। सच्चाई यह है कि व्यायाम मां और बच्चे के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है। सप्ताह में 4-5 बार कम से कम 30 मिनट का मध्यम व्यायाम करना उचित है।

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