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📰 मनरेगा पर सियासी संग्राम: 17 फरवरी को लखनऊ विधानसभा घेराव में गौतमबुद्ध नगर से ऐतिहासिक भागीदारी की तैयारी

मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”/ ग्रेटर नोएडा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 17 फरवरी 2026 की तारीख महत्वपूर्ण होती जा रही है। मनरेगा और श्रमिक अधिकारों को लेकर कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित लखनऊ विधानसभा घेराव को अब प्रदेशव्यापी जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। गौतमबुद्ध नगर से इस कार्यक्रम में भारी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के शामिल होने की रणनीति तैयार की गई है।
जिला कांग्रेस कार्यालय, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आयोजित विस्तृत प्रेस वार्ता में जिला अध्यक्ष दीपक भाटी चोटीवाला ने कहा कि यह संघर्ष केवल एक योजना को बचाने का नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, श्रमिक सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का आंदोलन है।
🔍 पृष्ठभूमि: क्यों बना मनरेगा मुद्दा?
मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) ग्रामीण भारत में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी देने वाली ऐतिहासिक योजना मानी जाती है। कांग्रेस का आरोप है कि:
मजदूरी भुगतान में लगातार देरी हो रही है।
स्वीकृत कार्यों की संख्या में कमी आई है।
तकनीकी व प्रशासनिक जटिलताओं के कारण गरीब परिवारों को काम नहीं मिल पा रहा।
जॉब कार्डधारकों का सत्यापन और फंड आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है।
दीपक भाटी चोटीवाला ने कहा, “मनरेगा गांवों की आर्थिक रीढ़ है। यदि इसे कमजोर किया गया तो इसका सीधा असर गरीब, किसान और श्रमिक वर्ग पर पड़ेगा। यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का प्रश्न है।”
📊5000 ‘मनरेगा बचाओ चौपाल’ आयोजित
प्रेस वार्ता में बताया गया कि पिछले एक माह में प्रदेश के 75 जिलों में लगभग 5000 ‘मनरेगा बचाओ चौपाल’ आयोजित की गईं। इन चौपालों में ग्रामीणों को उनके अधिकारों, भुगतान प्रक्रिया और शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी दी गई।
गौतमबुद्ध नगर में भी गांव-गांव जाकर पदयात्राएं और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिला अध्यक्ष के अनुसार, “लोगों में आक्रोश है, लेकिन यह आक्रोश लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त किया जाएगा।”
🚩 गौतमबुद्ध नगर की रणनीति
जिला कांग्रेस कमेटी ने ब्लॉक स्तर पर बैठकें कर कार्यकर्ताओं को लखनऊ पहुंचने के लिए संगठित किया है।
प्रत्येक ब्लॉक से निर्धारित संख्या में प्रतिनिधि भेजे जाएंगे।
महिला कार्यकर्ताओं और युवा कांग्रेस की विशेष भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
सेवादल और विभिन्न प्रकोष्ठों को समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पदाधिकारियों का कहना है कि यह भागीदारी केवल संख्या दिखाने के लिए नहीं, बल्कि प्रदेश की राजधानी में श्रमिकों की मजबूत आवाज उठाने के लिए है।
⚖️ विशेष एंगल: संवैधानिक अधिकार बनाम प्रशासनिक प्राथमिकताएं
कांग्रेस इस आंदोलन को संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और आजीविका के अधिकार) से जोड़कर देख रही है। पार्टी का तर्क है कि रोजगार की गारंटी केवल योजना नहीं, बल्कि गरीबों के सम्मानजनक जीवन का आधार है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में व्यापक प्रभाव डाल सकता है, विशेषकर उन जिलों में जहां मनरेगा पर निर्भरता अधिक है।

🎙️ प्रेस वार्ता में मौजूद पदाधिकारी
पत्रकार वार्ता में दुष्यंत नागर, जिला उपाध्यक्ष मुकेश शर्मा, पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ चेयरमैन महाराज सिंह नागर, अनुसूचित जाति मोर्चा चेयरमैन धर्म सिंह जीनवाल, सेवादल चेयरमैन सतीश शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष श्रुति कुमारी, जिला उपाध्यक्ष रिज़वान चौधरी, जिला उपाध्यक्ष निशा शर्मा, पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ चेयरमैन अरुण गुर्जर सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि 17 फरवरी का विधानसभा घेराव पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और जनहित में होगा।

🔮 आगे क्या?
राजनीतिक दृष्टि से यह घेराव प्रदेश में विपक्ष की सक्रियता का संकेत माना जा रहा है। यदि बड़ी संख्या में लोग लखनऊ पहुंचते हैं, तो यह सरकार पर नीतिगत पुनर्विचार का दबाव बना सकता है।
अब सबकी निगाहें 17 फरवरी पर टिकी हैं — क्या यह आंदोलन केवल प्रतीकात्मक रहेगा या प्रदेश की नीति और राजनीति में निर्णायक मोड़ साबित होगा, यह आने वाला समय बताएगा।