यूरोप की दहलीज पर भारतीय हस्तशिल्प: 61वें आईएचजीएफ मेले से ‘फ्लेवर ऑफ इंडिया’ की वैश्विक उड़ान

मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”/ ग्रेटर नोएडा
इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित 61वाँ आईएचजीएफ दिल्ली मेला – स्प्रिंग 2026 सिर्फ एक ट्रेड फेयर नहीं, बल्कि भारतीय हस्तशिल्प के लिए यूरोप और अमेरिका के बाजारों में नई रणनीतिक दस्तक का मंच बनकर उभरा है। मेले के तीसरे दिन का प्रमुख आकर्षण रहा ईपीसीएच–एक्सपो बाज़ार–टीआईसीए का विशेष सत्र, जिसने भारतीय निर्यातकों के लिए ‘फॉरवर्ड-लुकिंग एक्सपोर्ट आर्किटेक्चर’ की ठोस रूपरेखा प्रस्तुत की।
🔹 यूरोप में ‘जस्ट-इन-टाइम’ मॉडल से नई राह
इस सहयोग का मूल फोकस है—वेयरहाउसिंग, फुलफिलमेंट और जस्ट-इन-टाइम (JIT) डिलीवरी मॉडल के जरिए भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में मजबूत और स्थायी उपस्थिति दिलाना। भारत–ईयू व्यापार ढांचे में टैरिफ रैशनलाइजेशन और नीतिगत सकारात्मक संकेतों के बीच यह पहल रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। इसका उद्देश्य मैक्रो स्तर के व्यापार अवसरों को भारतीय निर्यातकों के लिए वास्तविक राजस्व वृद्धि में बदलना है।


🔹 ‘कैश-एंड-कैरी’ से ‘प्रोजेक्ट मॉडल’ तक
डॉ. राकेश कुमार (मुख्य संरक्षक, ईपीसीएच; अध्यक्ष, आईईएमएल) ने टीआईसीए के दो प्रमुख बिज़नेस मॉडल—कैश-एंड-कैरी और प्रोजेक्ट मॉडल—की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने बताया कि कोविड के बाद वैश्विक खरीदारों की प्राथमिकताएँ बदली हैं; वे कम लीड टाइम, अधिक कम्प्लायंस और तेज़ डिलीवरी चाहते हैं। यही कारण है कि यह मॉडल निर्यातकों के लिए अधिक लाभप्रद और प्रतिस्पर्धी साबित हो रहा है।
🔹 45,000 यूरोपीय बी2बी खरीदारों तक सीधी पहुँच
टीआईसीए के सीईओ रोजियर यूवेल ने बताया कि बेनेलक्स क्षेत्र में 45,000 से अधिक सदस्यों वाली उनकी कैश-एंड-कैरी चेन भारतीय निर्माताओं को सीधे यूरोपीय पेशेवर खरीदारों से जोड़ सकती है। चयनित भारतीय सप्लायर्स को नीदरलैंड्स और बेल्जियम के सेंटर्स तक पहुँच मिलेगी—यह अवसर केवल लेन-देन नहीं, बल्कि दीर्घकालिक साझेदारी का संकेत है।


ईपीसीएच के चेयरमैन डॉ. नीरज खन्ना ने इसे भारतीय हस्तशिल्प के लिए “भविष्य-उन्मुख निर्यात संरचना” बताते हुए कहा कि अधिक से अधिक सदस्य इस साझेदारी से लाभान्वित हों, यही परिषद का लक्ष्य है।

🔹 छोटे व युवा उद्यमियों के लिए बड़ा अवसर
कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने स्पष्ट किया कि यह मॉडल केवल बड़े खरीदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे और मध्यम रिटेल चेन्स को भी जोड़ता है, जो कम मात्रा में लेकिन बार-बार ऑर्डर देते हैं। इससे स्टोरेज, तेज़ शिपमेंट और बाजार विस्तार संभव होता है। टेक-ड्रिवन निर्यात इकोसिस्टम में यह पहल खासकर युवा उद्यमियों के लिए गेम-चेंजर बन सकती है।


🔹 डिज़ाइन 2027 की झलक और वैश्विक ट्रेंड्स
ज्ञान सत्रों में ‘डिज़ाइन फ्यूचर्स 2027’ और ‘व्हाट बायर्स वांट’ जैसे सेमिनारों ने सस्टेनेबिलिटी, इको-कॉन्शस एस्थेटिक्स और आधुनिक आर्टिसनल तकनीकों को वैश्विक ट्रेंड्स से जोड़ा। इससे स्पष्ट है कि भारतीय हस्तशिल्प अब केवल पारंपरिक कला नहीं, बल्कि नवाचार और पर्यावरणीय संवेदनशीलता का भी प्रतीक बन रहा है।
🔹 विदेशी खरीदारों का भरोसा
ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, बेल्जियम और जापान से आए खरीदारों ने भारतीय उत्पादों की कारीगरी, गुणवत्ता और विविधता की सराहना की। ऑस्ट्रेलिया के एंड्रयू नॉक्स ने कीमत से अधिक कारीगरी और दीर्घकालिक उपयोगिता को प्राथमिकता बताया, जबकि फ्रांस की मैक्सिम विबर्ट ने 100% भारत में निर्मित ब्रॉन्ज़ उत्पादों की उत्कृष्टता को रेखांकित किया।
🔹भारतीय हस्तशिल्प निर्यात 33,123 करोड़ रुपये (3,918 मिलियन डॉलर) तक पहुँचा
वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारतीय हस्तशिल्प निर्यात 33,123 करोड़ रुपये (3,918 मिलियन डॉलर) तक पहुँचा। यह आंकड़ा दर्शाता है कि यदि रणनीतिक साझेदारियाँ इसी तरह आगे बढ़ती रहीं, तो भारत वैश्विक हस्तशिल्प बाजार में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

विजन लाइव” का विश्लेषण

61वें आईएचजीएफ दिल्ली मेले का तीसरा दिन इस बात का संकेत दे गया कि भारतीय हस्तशिल्प अब पारंपरिक निर्यात मॉडल से आगे बढ़कर वैश्विक आपूर्ति शृंखला का सक्रिय, टेक-सक्षम और रणनीतिक हिस्सा बनने की दिशा में अग्रसर है। ‘फ्लेवर ऑफ इंडिया’ अब केवल एक थीम नहीं, बल्कि यूरोप और अमेरिका के बाजारों में भारत की सशक्त उपस्थिति का प्रतीक बनता जा रहा है।

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