
मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”/ ग्रेटर नोएडा
इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में सजे 61वें आईएचजीएफ दिल्ली मेला – स्प्रिंग 2026 ने यह साबित कर दिया कि भारतीय हस्तशिल्प अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार की मजबूत पहचान है। पांच दिनों तक चले इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में लगभग 100 देशों से 5200 से अधिक विदेशी खरीदार पहुंचे और करीब ₹2200 करोड़ के कारोबार ने भारतीय शिल्प की वैश्विक मांग को नई ऊंचाई दे दी।
जब परंपरा मिली आधुनिक डिज़ाइन से
इस बार मेले की सबसे बड़ी खासियत रही—परंपरागत शिल्प का आधुनिक प्रस्तुतीकरण।
लकड़ी के फर्नीचर पर मिनिमलिस्ट टच, मेटल क्राफ्ट में मॉडर्न फिनिश, प्राकृतिक फाइबर से बने इको-फ्रेंडली उत्पाद और सर्कुलर डिजाइन की अवधारणा ने अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को खासा प्रभावित किया।

ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी इस संस्करण का केंद्रीय विचार रहा। रिसाइकल्ड मटेरियल, मिट्टी आधारित उत्पाद, प्राकृतिक रंगों और पर्यावरण-अनुकूल प्रक्रियाओं से तैयार कलेक्शन ने यह संदेश दिया कि भारत का शिल्प उद्योग भविष्य के प्रति जिम्मेदार है।
3000 प्रदर्शक, 900 शोरूम और अनगिनत संभावनाएं
मेले में 3000 से अधिक प्रदर्शकों और 900 स्थायी शोरूम प्रतिभागियों ने भाग लिया।
टेक्सटाइल, कालीन, लकड़ी और धातु शिल्प, सजावटी वस्तुएं, फैशन ज्वेलरी, कैंडल, एरोमैटिक्स, कॉर्पोरेट गिफ्ट्स और सस्टेनेबल कलेक्शन—हर हॉल में रचनात्मकता और नवाचार की झलक दिखाई दी।
डॉ. राकेश कुमार, महानिदेशक (मुख्य संरक्षक), ईपीसीएच एवं अध्यक्ष, आईईएमएल ने कहा कि इंडिया एक्सपो सेंटर अब वैश्विक व्यापारिक साझेदारियों का स्थायी केंद्र बन चुका है, जहां नई और अनुभवी पीढ़ी के निर्यातक एक साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा तय कर रहे हैं।
नई पीढ़ी के डिजाइनर बने आकर्षण का केंद्र
इस बार कई नए डिजाइनर-उद्यमियों और दूरदराज़ के शिल्प ग्रामों से जुड़े कारीगरों ने पहली बार हिस्सा लिया।
कौशल विकास और डिजाइन इंटरवेंशन कार्यक्रमों से जुड़े शिल्पकारों को सीधे विदेशी खरीदारों से संवाद का अवसर मिला। कई स्टॉल्स पर मौके पर ही ऑर्डर फाइनल हुए, जबकि पोस्ट-शो डील्स की उम्मीद और भी अधिक है।

वैश्विक ब्रांडों की मजबूत मौजूदगी
जर्मनी, अमेरिका, स्पेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों के प्रमुख ब्रांडों और खरीद एजेंसियों ने सक्रिय भागीदारी की।
ऑस्ट्रेलिया की लिंडा ने बताया कि उनके कुल उत्पाद पोर्टफोलियो का लगभग 50% भारत से आता है। नीदरलैंड्स के एडी वर्सानिसेन ने भारतीय मेटल सेगमेंट को बेहद प्रतिस्पर्धी बताया। दक्षिण अफ्रीका के वॉरेन ने प्रीमियम ट्रॉपिकल फर्नीचर और लग्जरी होम डेकोर में खास रुचि दिखाई।
सम्मान और उत्कृष्टता का मंच
समापन समारोह में अध्यक्ष, हस्तशिल्प विकास बोर्ड, छत्तीसगढ़, शालिनी राजपूत ने 12 उत्पाद श्रेणियों में ‘अजय शंकर एवं पी.एन. सूरी मेमोरियल अवार्ड फॉर बेस्ट डिजाइन डिस्प्ले’ प्रदान किए।
लैंप्स, फर्नीचर, सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स, होम फर्निशिंग, फैशन ज्वेलरी और क्रिसमस डेकोरेशन सहित कई श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन को सम्मानित किया गया।

हस्तशिल्प निर्यात की मजबूत तस्वीर
कार्यकारी निदेशक राजेश रावत के अनुसार, वर्ष 2024-25 में भारत का कुल हस्तशिल्प निर्यात ₹33,123 करोड़ (3,918 मिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारतीय शिल्प केवल सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि मजबूत आर्थिक स्तंभ भी है।
ऑटम 2026 की ओर उम्मीदें
स्प्रिंग संस्करण की अभूतपूर्व सफलता के बाद अब उद्योग जगत की निगाहें अक्टूबर 2026 में होने वाले ऑटम संस्करण पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि अगला संस्करण और भी बड़े व्यापारिक अवसरों और व्यापक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का साक्षी बनेगा।

निष्कर्ष: भारत का हुनर, दुनिया का भरोसा
61वां आईएचजीएफ दिल्ली मेला – स्प्रिंग 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय हस्तशिल्प अब वैश्विक बाजार में गुणवत्ता, सस्टेनेबिलिटी और डिज़ाइन इनोवेशन का पर्याय बन चुका है।
₹2200 करोड़ के कारोबार और 100 देशों की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि भारत का हुनर अब दुनिया की पहली पसंद बनता जा रहा है।