मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”/ ग्रेटर नोएडा
गौतमबुद्धनगर जनपद के दादरी तहसील क्षेत्र से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें न्यायालय के नाम के कथित दुरुपयोग, फर्जी आधार कार्ड और पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र के सहारे विरासत अधिकारों में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित पक्ष ने इस पूरे प्रकरण में राजस्व अधिकारियों, ग्राम प्रधान और अधिवक्ताओं की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मामला ग्राम लुहारली निवासी महेश भाटी से जुड़ा है, जिनका विरासत संबंधी वाद वर्तमान में तहसीलदार (न्यायिक) दादरी के न्यायालय में विचाराधीन है। महेश भाटी का आरोप है कि उनके सगे भाई स्वर्गीय दिनेश भाटी की संपत्ति पर अधिकार जमाने के उद्देश्य से एक महिला द्वारा फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए।
फर्जी आधार और पारिवारिक प्रमाण पत्र का आरोप
शिकायत के अनुसार, सुनीता उर्फ अनिता, जो एक आपराधिक मामले में आजीवन कारावास की सजा पा चुकी है और वर्तमान में जमानत पर है, ने ग्राम प्रधान की कथित मिलीभगत से स्वयं को “अनिता पत्नी दिनेश भाटी” दर्शाते हुए फर्जी आधार कार्ड बनवाया। इसी आधार पर वर्ष 2022 में उपजिलाधिकारी दादरी से पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र भी जारी कराया गया।
सिविल जज के नाम का कथित दुरुपयोग
महेश भाटी का आरोप है कि इस फर्जी पहचान के आधार पर एक अधिवक्ता द्वारा सिविल जज (सीडी) न्यायालय, गौतमबुद्ध नगर में भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 372 के तहत वाद दाखिल किया गया, जिसकी प्रतिलिपि राजस्व अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर उनके विरासत वाद में बाधा उत्पन्न की गई।

पहले से दर्ज है एफआईआर
इस पूरे प्रकरण में थाना दादरी में मार्च 2025 में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जिसमें फर्जीवाड़ा और साजिश से जुड़े प्रावधानों के तहत आरोप दर्ज हैं। वहीं, जिलाधिकारी स्तर से कराई गई जांच में भी यह स्पष्ट किया गया है कि मामला सिविल न्यायालय में विचाराधीन है और तहसील स्तर पर हस्तक्षेप उचित नहीं है।
राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
पीड़ित का कहना है कि उपजिलाधिकारी और तहसीलदार द्वारा बिना सत्यापित साक्ष्य के यह मान लिया गया कि मामला सिविल कोर्ट में लंबित है, जिसके चलते उनके राजस्व वादों को स्थगित या निरस्त कर दिया गया। इससे उनके संवैधानिक और मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है।
मानसिक, आर्थिक और शारीरिक पीड़ा का हवाला
महेश भाटी ने बताया कि उनके परिवार में पहले ही दो भाइयों और एक पुत्र की हत्या हो चुकी है, जिससे वे गंभीर मानसिक और आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। ऐसे में प्रशासनिक लापरवाही और कथित मिलीभगत ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
पीड़ित ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा ग्राम प्रधान, संबंधित राजस्व अधिकारियों और अधिवक्ताओं की भूमिका की जांच कर न्यायहित में कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक और न्यायिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील बना हुआ है और अब सभी की निगाहें शासन स्तर से होने वाली संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।

