🔴 स्पेशल इंटरव्यू:- “सौतेला व्यवहार बर्दाश्त नहीं करेंगे किसान” किसान यूनियन अजगर (शक्ति) के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभु नागर की “विजन लाइव” न्यूज से खास बातचीत

मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”/ यीडा सिटी
यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के गांवों में बढ़ती नाराज़गी और किसानों की लंबित मांगों को लेकर किसान यूनियन अजगर (शक्ति) के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभु नागर ने विजन लाइव न्यूज से विशेष बातचीत में कई गंभीर मुद्दे उठाए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब किसानों के साथ भेदभाव और वादाखिलाफी स्वीकार नहीं की जाएगी।
🏗️ विकास के दावों के बीच गांवों की बदहाल तस्वीर
प्रभु नागर ने सबसे पहले यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के गांवों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
“यमुना प्राधिकरण, नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण करोड़ों की परियोजनाएं चला रहे हैं, लेकिन गांवों की हालत बद से बदतर है।”
उन्होंने बताया कि अधिकांश गांवों में:
शमशान घाट की उचित व्यवस्था नहीं
टूटी हुई सड़कें
पेयजल और सीवर की समस्या
सरकारी स्कूलों की कमी
बारातघर और सरकारी अस्पतालों का अभाव
बिजली के खंभों पर लाइटें तक नहीं
उनका आरोप है कि शहरी विकास के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों की अनदेखी की जा रही है।
💰 64.07% अतिरिक्त मुआवजा: आखिर अटका क्यों?
किसानों की सबसे बड़ी मांग 64.07% अतिरिक्त मुआवजे को लेकर है। प्रभु नागर ने दनकौर क्षेत्र के गांवों का उदाहरण देते हुए कहा कि अब तक किसानों को उनका हक नहीं मिला।
उन्होंने बताया कि यमुना प्राधिकरण द्वारा अधिकृत की गई जमीन जेपी कंपनी को दी गई थी, लेकिन अब यह मामला उलझ गया है।
कहा जा रहा है कि जमीन “एलएफडी” के तहत बैंकर्स के पास चली गई है क्योंकि कंपनी ने 64.07% अतिरिक्त मुआवजे के भुगतान में आनाकानी की।
“जब सरकार ने 64.07% मुआवजा देने का निर्णय ले लिया है, तो किसानों को भुगतान में देरी क्यों?” — प्रभु नागर
📐 7% या 10% प्लॉट? यही है बड़ा सवाल
प्रभु नागर ने प्लॉट आवंटन नीति को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उनका कहना है:
यमुना प्राधिकरण किसानों को 7% प्लॉट दे रहा है
जबकि ग्रेटर नोएडा में कोर्ट गए किसानों को 10% प्लॉट का प्रावधान दिया गया
उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुआवजा नीति समान है, तो प्लॉट नीति अलग क्यों?
“ग्रेटर नोएडा में 10% और यहां 7% — यह दोहरा मापदंड अब नहीं चलेगा।”
🏠 2500 मीटर का फार्मूला किसानों को मंजूर नहीं
आबादी नीति के तहत एक परिवार को 2500 वर्ग मीटर प्लॉट देने की बात कही जा रही है। इस पर प्रभु नागर ने स्पष्ट कहा कि यह फार्मूला व्यावहारिक नहीं है।
उन्होंने तर्क दिया कि:
यदि परिवार के मुखिया के कई बेटे हैं
और उनकी जमीन अधिकृत की गई है
तो सभी को उनकी जमीन के अनुपात में अलग-अलग 7% या 10% प्लॉट मिलना चाहिए
“एक परिवार – एक प्लॉट का नियम किसानों के साथ अन्याय है।”
📍 गांव में ही मिले प्लॉट
उन्होंने यह भी मांग रखी कि अधिकृत जमीन के बदले जो प्लॉट दिए जाएं, वे संबंधित गांव में ही दिए जाएं।
दूर-दराज प्लॉट देकर किसानों को विस्थापन की ओर धकेलना उचित नहीं है।
🛣️ नौरंगपुर-दनकौर मार्ग: ऐतिहासिक रास्ते पर विवाद
दनकौर क्षेत्र के ऐतिहासिक गांव औरंगपुर उर्फ नौरंगपुर के पुराने रास्ते को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है।
प्रभु नागर के अनुसार:
नौरंगपुर से दनकौर जाने वाला पुराना सीधा मार्ग साफ और पक्का किया जाए
रास्ता बंद कर अट्टा गुजरान की ओर से वैकल्पिक मार्ग देना स्वीकार नहीं होगा
“यह रास्ता ग्रामीणों की पहचान और सुविधा से जुड़ा है, इसे हर हाल में बहाल करना होगा।”
⚖️ संघर्ष का संकेत
बातचीत के अंत में प्रभु नागर ने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि यदि किसानों की मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन व्यापक आंदोलन की रणनीति बनाएगा।
उन्होंने कहा:
“किसानों को उनका अधिकार चाहिए, दया नहीं। विकास की दौड़ में गांवों को कुचला नहीं जाने देंगे।”
🔎 साफ संकेत
यह इंटरव्यू साफ संकेत देता है कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में किसान असंतोष गहराता जा रहा है। बुनियादी सुविधाओं से लेकर मुआवजा और प्लॉट नीति तक, कई मुद्दे सुलझने बाकी हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है — समाधान या टकराव?