छपरौला प्राइमरी स्कूल में बुनियादी सुविधाओं का संकट, महिला सभा की राष्ट्रीय सचिव सुनीता यादव ने BSA को पत्र सौंपा

छपरौला प्राइमरी स्कूल में बुनियादी सुविधाओं का संकट, महिला सभा की राष्ट्रीय सचिव सुनीता यादव ने BSA को पत्र सौंपा

 


मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”/ग्रेटर नोएडा
जनपद के छपरौला स्थित प्राथमिक विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर अब मामला प्रशासनिक स्तर पर पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी महिला सभा की राष्ट्रीय सचिव सुनीता यादव ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) गौतम बुद्ध नगर को औपचारिक रूप से पत्र सौंपकर विद्यालय में आवश्यक संसाधनों की तत्काल व्यवस्था करने की मांग की है।
यह कदम स्थानीय स्तर पर निरीक्षण और अभिभावकों से संवाद के बाद उठाया गया। सुनीता यादव ने बताया कि स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त डेस्क-बेंच उपलब्ध नहीं हैं, जिससे कई छात्र-छात्राओं को फर्श पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। इससे न केवल पढ़ाई प्रभावित होती है, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
पेयजल और स्वच्छता की चिंता
पत्र में विद्यालय में शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था न होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए RO सिस्टम और वाटर कूलर लगाए जाने की मांग की गई है। गर्मी के मौसम में स्वच्छ और ठंडे पानी की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक बताई गई है।
डिजिटल शिक्षा से वंचित ग्रामीण बच्चे
सुनीता यादव ने कहा कि आज जब शिक्षा का स्वरूप तेजी से डिजिटल हो रहा है, तब भी छपरौला प्राइमरी स्कूल में स्मार्ट क्लास जैसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कम से कम एक स्मार्ट क्लास (प्रोजेक्टर/स्मार्ट बोर्ड) स्थापित करने की मांग की, ताकि ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चों को भी तकनीक आधारित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। उनका कहना है कि डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता से बच्चों की सीखने की क्षमता और रुचि दोनों में वृद्धि होगी।
खेल सामग्री की कमी से प्रभावित सर्वांगीण विकास
पत्र में विद्यालय में खेल-कूद सामग्री की कमी को भी गंभीर विषय बताया गया है। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए झूले, फुटबॉल, क्रिकेट किट तथा इनडोर गेम्स जैसे कैरम बोर्ड आदि की आवश्यकता बताई गई है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर पर खेल गतिविधियां बच्चों के आत्मविश्वास और टीमवर्क की भावना को मजबूत करती हैं।
शिक्षा के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर
इस मुद्दे को शिक्षा व्यवस्था के व्यापक परिप्रेक्ष्य में भी देखा जा रहा है। एक ओर सरकारें प्राथमिक शिक्षा को सुदृढ़ करने और ‘सर्व शिक्षा अभियान’ जैसी योजनाओं के माध्यम से गुणवत्ता सुधार के दावे कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है।
सुनीता यादव ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा बच्चों की नींव होती है और यदि इसी स्तर पर संसाधनों की कमी रहेगी तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी। उन्होंने BSA से मांग की है कि विद्यालय का निरीक्षण कर आवश्यक बजट स्वीकृत किया जाए और शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
अब अभिभावकों और क्षेत्रवासियों की नजर शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

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