अजनारा होम्स (एपीवाई रियल्टी) पर ₹54.32 लाख का भारी जुर्माना लगाया

मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”
🔴 स्पेशल न्यूज़ स्टोरी | ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा में पर्यावरणीय नियमों और नागरिक स्वास्थ्य से जुड़े एक गंभीर मामले में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सेक्टर-16बी स्थित अजनारा होम्स (एपीवाई रियल्टी) पर ₹54.32 लाख का भारी जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई केवल आर्थिक दंड तक सीमित नहीं है, बल्कि बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जिससे बिल्डर लॉबी में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
जांच में सामने आया कि अजनारा होम्स में पिछले लगभग दो वर्षों से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) पूरी तरह बंद था। सोसाइटी में मौजूद करीब 2300 फ्लैटों से रोज़ाना औसतन 1.15 एमएलडी सीवेज उत्पन्न हो रहा था, जिसे बिना किसी ट्रीटमेंट के नालियों में छोड़ा जा रहा था।
स्थिति तब और भयावह हो गई जब नाली की लाइन चोक होने पर सीवेज को सोसाइटी के बेसमेंट में छोड़ दिया गया, जिससे हजारों निवासियों के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा का गंभीर संकट खड़ा हो गया।
नियमों की खुली अवहेलना
यह पूरा मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेशों के साथ-साथ CPCB और UPPCB के पर्यावरणीय मानकों का सीधा उल्लंघन पाया गया।
इसके अलावा,
पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए भूजल का अवैध दोहन,
और सॉलिड वेस्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण न करना
भी जांच में उजागर हुआ।
कैसे हुआ खुलासा?
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर सीवर विभाग ने 202 बिल्डर सोसाइटियों को नोटिस जारी कर एसटीपी की क्षमता, संचालन और शोधित पानी के पुनः उपयोग की जानकारी मांगी थी।
अजनारा होम्स की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया, जिसके बाद निवासियों की शिकायत पर सीवर विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक सन्नी यादव के नेतृत्व में टीम ने मौके पर निरीक्षण किया और गंभीर खामियां पाई गईं।
क्या-क्या कार्रवाई हुई?
✔️ ₹50 लाख — एसटीपी बंद रखने, बिना ट्रीटमेंट सीवेज डिस्चार्ज और भूजल दोहन पर
✔️ ₹4.32 लाख — सॉलिड वेस्ट प्रबंधन में लापरवाही पर
✔️ कुल जुर्माना: ₹54.32 लाख
✔️ 7 कार्य दिवस में जुर्माना जमा करने का अल्टीमेटम
✔️ बिल्डर पर FIR के लिए पुलिस को पत्र
✔️ दोबारा उल्लंघन पर लीज शर्तों के तहत सख्त कार्रवाई की चेतावनी


प्राधिकरण का सख्त संदेश
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सुनील कुमार सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि हर बिल्डर सोसाइटी में STP का संचालन अनिवार्य है और शोधित पानी का उपयोग सिंचाई, फ्लशिंग और अन्य कार्यों में किया जाना चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बिना किसी दबाव के कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
क्यों है यह मामला खास?
यह कार्रवाई सिर्फ एक सोसाइटी तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रेटर नोएडा की अन्य बिल्डर सोसाइटियों के लिए सख्त चेतावनी है कि पर्यावरण और नागरिक स्वास्थ्य से समझौता अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में और बड़ी कार्रवाइयों की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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