ग्रीन ग्रोथ’ और ग्लोबल कनेक्टिविटी के साथ भारतीय हस्तशिल्प का नया अध्याय

🔴 स्पेशल विस्तृत रिपोर्ट | ‘ग्रीन ग्रोथ’ और ग्लोबल कनेक्टिविटी के साथ भारतीय हस्तशिल्प का नया अध्याय
61वां आईएचजीएफ दिल्ली मेला – स्प्रिंग 2026 | दूसरा दिन विशेष विश्लेषण
📍मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी” / इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा | 15 फरवरी 2026
ग्रेटर नोएडा में चल रहे 61वें आईएचजीएफ दिल्ली मेला – स्प्रिंग 2026 के दूसरे दिन यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि भारतीय हस्तशिल्प उद्योग अब पारंपरिक पहचान से आगे बढ़कर रणनीतिक वैश्विक विस्तार, सस्टेनेबल उत्पादन और मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) के प्रभावी उपयोग की दिशा में संगठित और आत्मविश्वासपूर्ण कदम बढ़ा रहा है।
यह मेला केवल उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की बदलती निर्यात सोच और ‘ग्रीन ग्रोथ मॉडल’ का जीवंत उदाहरण बन चुका है।
🌍 अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता की मजबूत पुष्टि
17 विशाल हॉलों में 16 उत्पाद श्रेणियों के साथ 3000 से अधिक प्रदर्शक और 900 स्थायी शोरूम—यह आंकड़े ही इस आयोजन की व्यापकता को दर्शाते हैं।
मध्य-पूर्व, यूरोप, अमेरिका और एशिया के विभिन्न देशों से आए खरीदारों की सक्रिय उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि वैश्विक बाजार में भारत की विश्वसनीयता लगातार बढ़ रही है।
ईपीसीएच अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि भारतीय उत्पादों की हैंडक्राफ्टेड वैल्यू एडिशन, सूक्ष्म कारीगरी और वैश्विक ट्रेंड के अनुरूप डिज़ाइन नवाचार खरीदारों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहे हैं।
खरीदारों ने माना कि समकालीन सौंदर्य के साथ भारतीय शिल्प की पारंपरिक बारीकी का मेल विश्व बाजार में अनूठी पहचान बना रहा है।
♻️ सस्टेनेबिलिटी: निर्यात प्रतिस्पर्धा का नया आधार
दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण रहा ‘Sustainability – More Than a Trend!’ सेमिनार।
जर्मनी के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ ने वास्तविक उत्पाद उदाहरणों के माध्यम से बताया कि—
रिसाइकिल्ड कच्चे माल का उपयोग
प्राकृतिक रंगों और जैविक फाइबर का प्रयोग
कार्बन फुटप्रिंट में कमी
पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग
कैसे निर्यात में दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करते हैं।
प्रदर्शकों द्वारा कपास और जूट आधारित लाइफस्टाइल उत्पाद, रिसाइकिल्ड फैब्रिक डेकोर आइटम, प्राकृतिक रंगों से हैंड-पेंटेड वस्त्र और प्लांट फाइबर से बने फैशन एक्सेसरीज प्रस्तुत किए गए—जो वैश्विक ‘ग्रीन कंज्यूमरिज्म’ की मांग के अनुरूप हैं।
यह स्पष्ट हुआ कि अब सस्टेनेबिलिटी केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि ब्रांड वैल्यू और मार्केट एक्सेस की अनिवार्य शर्त बन चुकी है।
📈 एफटीए से निर्यात वृद्धि की नई राह
‘Leveraging India’s Recent Free Trade Agreements’ विषयक सेमिनार ने निर्यातकों को व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया।
भारत-यूके CETA, भारत-ईयू FTA और भारत-यूएई CEPA जैसे समझौतों के तहत—
टैरिफ में कमी
कस्टम ड्यूटी में राहत
आसान बाजार प्रवेश
प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण
जैसे अवसरों को विस्तार से समझाया गया।
विशेषज्ञों ने एमएसएमई निर्यातकों को बताया कि किस प्रकार दस्तावेजीकरण, लॉजिस्टिक्स और अनुपालन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर इन समझौतों का अधिकतम लाभ लिया जा सकता है।
🌐 मार्केट डाइवर्सिफिकेशन: पारंपरिक बाजारों से आगे
‘Market Diversification – Emerging Destinations and Trend Drivers’ सत्र ने उभरते बाजारों—पूर्वी यूरोप, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और मध्य-पूर्व—की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
विशेषज्ञों ने बताया कि—
बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताएं
डिजिटल रिटेलिंग
कस्टमाइजेशन की बढ़ती मांग
प्रीमियम और निच सेगमेंट की वृद्धि
भारतीय हस्तशिल्प के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं।
यह सत्र विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए उपयोगी रहा, जिन्हें अपने बाजार आधार को विस्तारित करने की दिशा में स्पष्ट रणनीति मिली।
🎨 लाइव आर्ट ऑक्शन: भारतीय शिल्प का वैश्विक मूल्यांकन
भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के सहयोग से आयोजित भारतीय मास्टर क्राफ्ट्स की लाइव आर्ट नीलामी ने दर्शकों और खरीदारों को उत्साहित कर दिया।
कई उत्कृष्ट शिल्पकृतियां आरक्षित मूल्य से दोगुने से अधिक कीमत पर बिकीं। यह न केवल कला की सराहना थी, बल्कि भारतीय शिल्प की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग और मूल्यांकन का प्रमाण भी था।


🛍️ खरीदारों की प्रतिक्रिया: भारत से दूर जाना विकल्प नहीं
अमेरिका, फ्रांस और पोलैंड से आए खरीदारों ने स्पष्ट कहा कि भारत उनकी सोर्सिंग रणनीति का केंद्रीय आधार है।
लकड़ी और एनामेल उत्पादों की फिनिशिंग, ग्लासवेयर की गुणवत्ता, कस्टमाइज्ड फैशन ज्वेलरी की डिजाइन विविधता और रिसाइकिल्ड सामग्री के उपयोग ने विशेष आकर्षण पैदा किया।
एक अमेरिकी खरीदार ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“भारत से सोर्सिंग हमारे व्यवसाय का मूल है, इससे दूर जाना संभव नहीं।”
📊 निर्यात आंकड़ों से मजबूती
ईपीसीएच के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत का कुल हस्तशिल्प निर्यात 33,123 करोड़ रुपये (3,918 मिलियन डॉलर) रहा।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय हस्तशिल्प उद्योग ने अपनी स्थिरता और विकास क्षमता को बनाए रखा है।
🔎 व्यापक निष्कर्ष
61वें आईएचजीएफ दिल्ली मेला – स्प्रिंग 2026 का दूसरा दिन यह संदेश दे गया कि भारतीय हस्तशिल्प उद्योग अब—
✔ परंपरा और आधुनिकता का संतुलित समन्वय
✔ सस्टेनेबल उत्पादन मॉडल
✔ मुक्त व्यापार समझौतों का रणनीतिक उपयोग
✔ नए बाजारों की खोज
के माध्यम से वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति को और मजबूत कर रहा है।
यह मेला केवल व्यापारिक मंच नहीं, बल्कि भारत की शिल्प विरासत को वैश्विक आर्थिक शक्ति में परिवर्तित करने की दूरदर्शी पहल बनकर उभर रहा है।

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