61वाँ आईएचजीएफ दिल्ली मेला–स्प्रिंग 2026 बना ‘ग्लोबल क्राफ्ट डिप्लोमेसी’ का मंच

🔴 Vision Live News | स्पेशल कवरेज
60,000 करोड़ के लक्ष्य की ओर निर्णायक कदम

61वाँ आईएचजीएफ दिल्ली मेला–स्प्रिंग 2026 बना ‘ग्लोबल क्राफ्ट डिप्लोमेसी’ का मंच


मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”/ ग्रेटर नोएडा
इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 61वें आईएचजीएफ दिल्ली मेला–स्प्रिंग 2026 का उद्घाटन केवल एक व्यापारिक आयोजन की शुरुआत नहीं, बल्कि भारत की हस्तशिल्प अर्थव्यवस्था के लिए एक रणनीतिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। माननीय केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह द्वारा उद्घाटित इस मेले ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब वैश्विक हस्तशिल्प व्यापार में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
🇮🇳 “हर कारीगर 5 लाख वार्षिक आय तक पहुँचे” – स्पष्ट सरकारी लक्ष्य
अपने संबोधन में गिरिराज सिंह ने सरकार की प्राथमिकता रेखांकित करते हुए कहा कि हस्तशिल्प क्षेत्र केवल सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक नहीं, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत की आर्थिक रीढ़ है।
उन्होंने कहा:
“हम सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि देश का प्रत्येक कारीगर सालाना 5 लाख रुपये कमाने में सक्षम हो। हमने 40 नए बाजारों को लक्ष्य किया है और 60,000 करोड़ रुपये के निर्यात लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”
यह बयान इस बात का संकेत है कि सरकार अब हस्तशिल्प क्षेत्र को ‘सामाजिक कल्याण’ की श्रेणी से निकालकर ‘रणनीतिक आर्थिक क्षेत्र’ के रूप में देख रही है।
🌍 एफटीए के बाद यूरोप की बढ़ी दिलचस्पी – भारत बना भरोसेमंद सोर्सिंग पार्टनर
हालिया मुक्त व्यापार समझौतों (Free Trade Agreements) के बाद वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ी है।
यूरोप से स्थापित और नए खरीदारों की बढ़ती भागीदारी इस बदलाव का प्रमाण है।
109 से अधिक देशों के खरीदारों द्वारा भागीदारी की पुष्टि यह दर्शाती है कि आईएचजीएफ अब एशिया का सबसे प्रभावशाली सोर्सिंग प्लेटफॉर्म बन चुका है।
🏢 इंडिया एक्सपो सेंटर: व्यापारिक कूटनीति का केंद्र
डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि यह मेला लगभग तीन दशकों से भारतीय कारीगरी को विश्व मंच पर स्थापित कर रहा है।
900 स्थायी मार्ट शोरूम वर्षभर अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ व्यापारिक संवाद बनाए रखते हैं।
इससे ग्रेटर नोएडा अब केवल एक प्रदर्शनी स्थल नहीं, बल्कि निर्यात-आधारित आर्थिक गतिविधियों का स्थायी केंद्र बन गया है।
🧵 परंपरा + नवाचार = नया बिजनेस मॉडल
इस संस्करण की विशेषताएँ:
डिज़ाइन-आधारित वैल्यू एडिशन
इको-फ्रेंडली और सस्टेनेबल उत्पाद
डिजिटल रेडीनेस और ई-कॉमर्स इंटीग्रेशन
लाइव क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन
थीम आधारित पवेलियन
ज्ञानवर्धक सत्र और नेटवर्किंग जोन
ईपीसीएच अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि हर संस्करण के साथ मेला अधिक परिष्कृत होता गया है और नए खरीदार–विक्रेता संबंध स्थापित कर रहा है।
📊 आंकड़ों में ताकत
2024-25 में हस्तशिल्प निर्यात: 33,123 करोड़ रुपये
लक्ष्य: 60,000 करोड़ रुपये
लक्षित नए बाजार: 40 देश
भागीदारी की पुष्टि: 109+ देश
🧭 क्षेत्रीय संतुलन पर जोर
गिरिराज सिंह ने मुरादाबाद और जयपुर जैसे पारंपरिक केंद्रों का उल्लेख करते हुए उत्तर-पूर्वी राज्यों की बुनाई और शिल्प क्षमता को वैश्विक स्तर पर ले जाने पर बल दिया।
💼 “हम व्यापार के लिए तैयार हैं” – उद्योग का आत्मविश्वास
मोहित चोपड़ा, प्रेसिडेंट, आईएचजीएफ दिल्ली फेयर–स्प्रिंग 2026 रिसेप्शन कमेटी ने कहा कि मेले से पहले प्रील्यूड आयोजित करना हमारी तैयारी और व्यापारिक तत्परता का प्रमाण है।
गौतम नथानी और आनंद जलान ने कहा कि इस बार उत्पादों की विविधता, डिज़ाइन और उपयोगिता का संतुलन वैश्विक खरीदारों को आकर्षित करेगा।
राजेश रावत, कार्यकारी निदेशक, ईपीसीएच ने बताया कि भारतीय हस्तशिल्प क्षेत्र गुणवत्ता, प्रामाणिकता और नवाचार के साथ ब्रांड इंडिया को सशक्त कर रहा है।


📌 “विजन लाइव” का विश्लेषण
61वाँ आईएचजीएफ दिल्ली मेला–स्प्रिंग 2026 केवल एक ट्रेड फेयर नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक, सांस्कृतिक और निर्यात क्षमता का सशक्त प्रदर्शन है।
यह मेला साबित करता है कि “मेड इन इंडिया” अब केवल एक टैग नहीं, बल्कि गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक भरोसे का प्रतीक बन चुका है।
📍 Vision Live News इस मेले की हर बड़ी अपडेट आप तक पहुँचाता रहेगा।

Leave a Reply

Translate »