शिक्षा, कौशल और उद्योग को जोड़ता उत्तर प्रदेश का बजट: युवा सशक्तिकरण की नई दिशा


स्वदेश कुमार सिंह, सीईओ, जीएनआईओटी इंस्टीट्यूशंस ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत नवीन बजट राज्य के समग्र, संतुलित और दीर्घकालिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम है। यह बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश को शिक्षा, कौशल, उद्योग और नवाचार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की स्पष्ट रणनीति प्रस्तुत करता है। विशेष रूप से शिक्षा और उद्योग के बीच समन्वय स्थापित करने पर दिया गया जोर इसे युवाओं के भविष्य से सीधे तौर पर जोड़ता है।
शिक्षा से रोजगार तक की स्पष्ट नीति
उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में किए गए प्रावधान इस बजट की प्रमुख विशेषताओं में से हैं। आधुनिक प्रयोगशालाओं, डिजिटल लर्निंग इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च एवं इनोवेशन केंद्रों तथा इंडस्ट्री–इंस्टीट्यूट पार्टनरशिप को बढ़ावा देने की पहल विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें व्यावहारिक और रोजगारपरक कौशल भी प्रदान करेगी।
आज की सबसे बड़ी चुनौती “डिग्री और रोजगार” के बीच की दूरी है। यदि शैक्षणिक संस्थान उद्योगों के साथ मिलकर पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण मॉडल विकसित करें, तो छात्र सीधे बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार होंगे। यह बजट इसी दिशा में सकारात्मक संकेत देता है।
स्टार्टअप और नवाचार को मिलेगा अवसर
बजट में स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता को विशेष प्राथमिकता देना यह दर्शाता है कि सरकार युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजक के रूप में देखना चाहती है। इन्क्यूबेशन सेंटरों की स्थापना, मेंटरशिप सपोर्ट, वित्तीय सहयोग और नवाचार-आधारित योजनाएँ प्रदेश में एक सशक्त स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित कर सकती हैं।
यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है, तो उत्तर प्रदेश तकनीक, एग्री-टेक, मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र में नए उद्यमों का केंद्र बन सकता है।
कौशल विकास और औद्योगिक प्रगति
कौशल विकास मिशन और उद्योग आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदेश की औद्योगिक वृद्धि को गति देंगे। स्थानीय उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण से युवाओं को रोजगार मिलेगा और उद्योगों को दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध होगा।
अधोसंरचना विकास, निवेश को प्रोत्साहन और औद्योगिक कॉरिडोर जैसी पहलों से प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होगा, जिससे व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन संभव होगा।
समावेशी और संतुलित विकास की दिशा
बजट की एक महत्वपूर्ण विशेषता सामाजिक समावेशन और क्षेत्रीय संतुलन पर दिया गया ध्यान है। ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों में शिक्षा और उद्योग से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार विकास को व्यापक आधार प्रदान करेगा। इससे समाज के प्रत्येक वर्ग को मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
निष्कर्ष:
समग्र रूप से यह बजट शिक्षा, कौशल और उद्योग को एकीकृत दृष्टिकोण से जोड़ते हुए युवाओं को केंद्र में रखकर तैयार किया गया प्रतीत होता है। यदि योजनाओं का पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है, तो उत्तर प्रदेश शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर सकता है तथा ‘नॉलेज एवं स्किल हब’ के रूप में अपनी पहचान सुदृढ़ कर सकता है।
यह बजट निस्संदेह एक सकारात्मक, विकासोन्मुखी और भविष्यदर्शी पहल है, जो प्रदेश को आत्मनिर्भरता और प्रगतिशीलता की दिशा में आगे बढ़ाने की क्षमता रखता है।
लेखक परिचय:
स्वदेश कुमार सिंह
सीईओ, जीएनआईओटी इंस्टीट्यूशंस ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज
स्वदेश कुमार सिंह उच्च शिक्षा एवं प्रबंधन अध्ययन के क्षेत्र में एक अनुभवी शिक्षाविद् एवं प्रशासक हैं। वे वर्तमान में जीएनआईओटी इंस्टीट्यूशंस ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के सीईओ के रूप में कार्यरत हैं और संस्थान के शैक्षणिक विकास, उद्योग–संस्थान समन्वय, कौशल उन्नयन तथा नवाचार आधारित शिक्षा मॉडल को सशक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
उच्च शिक्षा, प्रबंधन प्रशिक्षण, स्टार्टअप प्रोत्साहन एवं युवा सशक्तिकरण उनके कार्य के प्रमुख क्षेत्र हैं। वे शिक्षा को रोजगारपरक दक्षता, नेतृत्व विकास और उद्यमिता से जोड़ने के पक्षधर हैं।
कानूनी डिस्क्लेमर:
यह लेख लेखक के व्यक्तिगत विचारों और विश्लेषण पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार किसी संस्था, संगठन या सरकारी निकाय की आधिकारिक नीति का अनिवार्य रूप से प्रतिनिधित्व नहीं करते। लेख में उल्लिखित टिप्पणियाँ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी एवं सामान्य विश्लेषण पर आधारित हैं।
इस लेख का उद्देश्य केवल शैक्षणिक एवं विचार-विमर्श हेतु जानकारी प्रदान करना है। किसी भी प्रकार के वित्तीय, निवेश या नीतिगत निर्णय लेने से पूर्व आधिकारिक दस्तावेजों एवं विशेषज्ञ सलाह का परामर्श करना आवश्यक है।

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