
बांदा जेल कांड: कुख्यात अपराधी की अवैध रिहाई पर जेल अधीक्षक व जेलर के खिलाफ FIR, उच्चस्तरीय जांच के संकेत

मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”
बांदा | स्पेशल रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद स्थित जिला कारागार से कुख्यात अपराधी रवि काना की कथित अवैध रिहाई का मामला अब गंभीर कानूनी और प्रशासनिक संकट में तब्दील हो गया है। बिना किसी सक्षम न्यायालय के वैध रिहाई आदेश के अपराधी को जेल से बाहर किए जाने के आरोप में जेल प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
प्रकरण सामने आते ही जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और पूरे महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
बिना न्यायिक आदेश छोड़ा गया कुख्यात अपराधी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रवि काना को रिहा करने के लिए न तो किसी अदालत का लिखित आदेश मौजूद था और न ही किसी वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया। इसके बावजूद उसे जिला कारागार से बाहर कर दिया गया, जो सीधे तौर पर जेल मैनुअल और कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन माना जा रहा है।
जेल अधीक्षक और जेलर पर दर्ज हुई FIR
मामले की गंभीरता को देखते हुए बांदा जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम और जेलर विक्रम सिंह यादव के खिलाफ नगर कोतवाली बांदा में मुकदमा दर्ज किया गया है।
यह FIR जेल चौकी प्रभारी अनुराग पाण्डेय की तहरीर पर दर्ज की गई, जिसमें नियमों की घोर अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
सबसे बड़ा सवाल
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
रिहाई से संबंधित आदेश किस स्तर पर तैयार किया गया
किन दस्तावेजों के आधार पर कैदी को छोड़ा गया
क्या इस पूरे प्रकरण में किसी प्रकार की मिलीभगत, दबाव या निजी लाभ की भूमिका रही
सूत्रों का मानना है कि मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर संभावित साठगांठ की ओर इशारा करता है।
उच्चस्तरीय विभागीय जांच के संकेत
सूत्रों के मुताबिक इस प्रकरण की उच्चस्तरीय विभागीय जांच के आदेश दिए जा सकते हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों पर—
निलंबन
विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई
और कठोर कानूनी दंड
तय माने जा रहे हैं।
कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने न सिर्फ जेल प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि कानून-व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आमजन के बीच यह चिंता गहराती जा रही है कि जब कुख्यात अपराधी नियमों को ताक पर रखकर रिहा हो सकते हैं, तो आम नागरिक की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।
जांच जारी
फिलहाल पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां मामले की गहन जांच में जुटी हुई हैं। आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और विभागीय निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।