
आईटी निवेश को नई रफ्तार देने की तैयारी में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण

मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”/ ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा को एनसीआर के प्रमुख आईटी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने एक अहम और दूरदर्शी पहल शुरू की है। प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर अब प्राधिकरण की टीम सीधे आईटी कंपनियों और निवेशकों से संवाद कर रही है, ताकि जमीनी स्तर पर मौजूद समस्याओं को समझकर उनका व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके।
इस पहल के तहत प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी भी सक्रिय रूप से मैदान में उतर चुके हैं। हाल ही में एसीईओ सुनील कुमार सिंह और एसीईओ प्रेरणा सिंह ने टेकजोन-4 क्षेत्र में स्थित पांच प्रमुख आईटी कंपनियों—ओसियन इंफ्रा हाइट्स, एसपीआई आईटी, एडवांस कंप्यूसॉफ्ट, अर्था इंफ्राटेक और भूटानी आईटी पार्क—का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने कंपनी प्रबंधन से विस्तार से चर्चा कर आईटी सेक्टर से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों और संभावनाओं की जानकारी ली।

आईटी सेक्टर में अपार संभावनाएं
ग्रेटर नोएडा इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में पहले से ही एनसीआर के कई शहरों से आगे है। आगामी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से यहां आईटी और टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों के लिए संभावनाएं और मजबूत होंगी। इसके अलावा आईटी भूखंडों की पर्याप्त उपलब्धता ग्रेटर नोएडा को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाती है।
प्राधिकरण जल्द ही आईटी भूखंडों के लिए नई स्कीम लाने की तैयारी में है, लेकिन सीईओ की स्पष्ट मंशा है कि इससे पहले मौजूदा आवंटियों और संभावित निवेशकों की समस्याओं को समझा जाए। इसी उद्देश्य से आईटी कंपनियों से यह जाना जा रहा है कि—
आईटी भूखंडों के आवंटन की मौजूदा शर्तों में किन सुधारों की आवश्यकता है।
भूखंड आवंटन के बाद परियोजना शुरू करने में कौन-कौन सी अड़चनें आती हैं।
आईटी सेक्टर में किस कैटेगरी का कार्य भविष्य में अधिक संभावनाशील है।

सुझाव शासन व बोर्ड के समक्ष रखे जाएंगे
कंपनियों से मिले सुझावों पर प्रतिक्रिया देते हुए एसीईओ सुनील कुमार सिंह ने कहा कि
“ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण आईटी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए हर संभव कदम उठाने को प्रतिबद्ध है। आईटी कंपनियों से प्राप्त सभी सुझावों को प्राधिकरण बोर्ड और शासन के समक्ष रखा जाएगा। आवश्यक अनुमतियों के बाद ठोस निर्णय लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
प्राधिकरण की यह पहल न केवल मौजूदा आईटी कंपनियों की समस्याओं के समाधान की दिशा में अहम मानी जा रही है, बल्कि इससे ग्रेटर नोएडा को एक मजबूत, निवेश-अनुकूल और भविष्य का आईटी डेस्टिनेशन बनाने की नींव भी तैयार हो रही है।