61वाँ आईएचजीएफ दिल्ली मेला – स्प्रिंग 2026 पहले दिन उमड़ा वैश्विक विश्वास, भारतीय शिल्प की चमक

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61वाँ आईएचजीएफ दिल्ली मेला – स्प्रिंग 2026
पहले दिन उमड़ा वैश्विक विश्वास, भारतीय शिल्प की चमक से रोशन हुआ ग्रेटर नोएडा


मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”/ ग्रेटर नोएडा
इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट के भव्य परिसर में 61वाँ आईएचजीएफ दिल्ली मेला – स्प्रिंग 2026 का आगाज़ अंतरराष्ट्रीय उत्साह और व्यापारिक सक्रियता के साथ हुआ। 14 से 18 फरवरी तक चलने वाले इस मेगा सोर्सिंग शो ने पहले ही दिन यह संकेत दे दिया कि भारतीय हस्तशिल्प उद्योग वैश्विक मंच पर नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है।
एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स (ईपीसीएच) द्वारा आयोजित यह मेला न केवल उत्पाद प्रदर्शन का मंच है, बल्कि यह भारतीय कारीगरों की विरासत, नवाचार और आधुनिक बाजार की जरूरतों के संगम का सजीव उदाहरण है।
प्रदर्शनी हॉल्स में दिनभर रही रौनक
सुबह से ही विदेशी खरीदारों, बाइंग हाउसेज़, आयातकों, एजेंट्स और घरेलू वॉल्यूम खरीदारों की लगातार आवाजाही से पूरे परिसर में जीवंत माहौल बना रहा। विभिन्न हॉल्स में होम डेकोर, फर्नीचर, टेक्सटाइल्स, फैशन ज्वेलरी, गिफ्ट आइटम्स, लाइफस्टाइल एक्सेसरीज़ और क्रिसमस डेकोर जैसे विविध उत्पाद वर्गों में खरीदारों ने गहरी रुचि दिखाई।
खास बात यह रही कि कई नए प्रदर्शकों को पहली ही मुलाकात में गंभीर व्यापारिक पूछताछ प्राप्त हुई, जबकि पुराने प्रदर्शकों ने अपने दीर्घकालिक अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ नए ऑर्डर और उत्पाद विस्तार पर चर्चा की।


मंत्री का संदेश: “भारत को पहचान दिलाइए”
उत्तर प्रदेश सरकार में कौशल विकास एवं व्यावसायिक शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने मेले का दौरा कर प्रदर्शकों से सीधा संवाद किया। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता, डिज़ाइन और निर्यात क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश हस्तशिल्प निर्यात में निरंतर प्रगति कर रहा है।
उन्होंने कहा कि आगामी जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लॉजिस्टिक्स और वैश्विक कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी, जिससे निर्यातकों को प्रत्यक्ष लाभ होगा।
प्रदर्शकों को “रचनाकार” बताते हुए उन्होंने युवा पीढ़ी को शिल्प परंपरा से जोड़ने और कौशल प्रशिक्षण संस्थानों को उद्योग से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका संदेश स्पष्ट था—भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए सामूहिक प्रयास अनिवार्य हैं।
व्यापारिक संभावनाओं की नई दिशा
ईपीसीएच के चेयरमैन डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि मेले की शुरुआत अत्यंत उत्साहजनक रही है। विदेशी खरीदारों की सक्रिय भागीदारी से न केवल नए व्यापारिक रिश्ते बन रहे हैं, बल्कि पुराने संबंध और सुदृढ़ हो रहे हैं।
आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि 900 स्थायी मार्ट शोरूम और अत्याधुनिक ‘इंडिया सेंटर’ खरीदारों को वर्षभर सोर्सिंग की सुविधा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि तीन दशकों से अधिक समय से यह मेला भारतीय हस्तशिल्प के लिए वैश्विक व्यापार का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
मास्टर क्राफ्ट्स’ की ऐतिहासिक आर्ट ऑक्शन
मेले का एक प्रमुख आकर्षण ‘भारत के मास्टर क्राफ्ट्स की एक्सक्लूसिव आर्ट ऑक्शन’ है। वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय द्वारा आयोजित इस पहल में शिल्प गुरु और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं (2023–24) की 12 विशिष्ट कृतियाँ प्रस्तुत की जाएँगी।
ये कृतियाँ केवल उत्पाद नहीं, बल्कि दशकों की साधना, परंपरा और गुरु–शिष्य परंपरा की जीवंत धरोहर हैं। यह लाइव ऑक्शन हॉल 16 के एक्टिविटी एरिया में आयोजित होगी, जहाँ वैश्विक खरीदार इन दुर्लभ कलाकृतियों के लिए बोली लगाएंगे।
ज्ञान सत्रों के माध्यम से बाजार की समझ
आईएचजीएफ रिसेप्शन कमेटी के प्रेसिडेंट मोहित चोपड़ा ने बताया कि आगामी दिनों में सस्टेनेबिलिटी, भारत के मुक्त व्यापार समझौतों के लाभ, उभरते निर्यात गंतव्य और मार्केट डाइवर्सिफिकेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए जाएंगे।
इन सत्रों का उद्देश्य निर्यातकों को बदलते वैश्विक बाजार रुझानों, पर्यावरणीय मानकों और प्रतिस्पर्धात्मक रणनीतियों के प्रति जागरूक करना है।


विदेशी खरीदारों का बढ़ता विश्वास
अमेरिका से आए पॉल और एलिज़ाबेथ ने कहा कि भारत बड़े पैमाने पर उत्पादन, गुणवत्ता और विश्वसनीयता के कारण उनका प्रमुख सोर्सिंग केंद्र है।
यूके की जिल लार्क्स ने बताया कि वह गिफ्ट्स, टेक्सटाइल्स, ज्वेलरी और क्रिसमस डेकोर उत्पादों के लिए भारत को प्राथमिकता देती हैं।
दक्षिण अफ्रीका की डेबोरा टेलर ने साझा किया कि वह अपने सप्लाई बेस का विविधीकरण कर रही हैं और अब उनके कुल उत्पादों का लगभग 40–50% हिस्सा भारत से सोर्स होता है। भारत–यूके मुक्त व्यापार समझौते ने उनके व्यापार विस्तार को गति दी है।
निर्यात आंकड़े और भविष्य की दिशा
ईपीसीएच के अनुसार वर्ष 2024–25 में भारत से हस्तशिल्पों का कुल निर्यात 33,123 करोड़ रुपये (3,918 मिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारतीय हस्तशिल्प उद्योग वैश्विक मांग को सफलतापूर्वक पूरा कर रहा है।
आईएचजीएफ दिल्ली मेला न केवल व्यापारिक सौदों का मंच है, बल्कि यह “मेक इन इंडिया” और “वोकल फॉर लोकल” की भावना को वैश्विक पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम भी है।


समापन
61वाँ आईएचजीएफ दिल्ली मेला – स्प्रिंग 2026 का पहला दिन भारतीय हस्तशिल्प की रचनात्मक शक्ति, वैश्विक विश्वास और आर्थिक संभावनाओं का सशक्त परिचायक रहा। आने वाले दिनों में ज्ञान सत्रों, आर्ट ऑक्शन और गहन व्यापारिक बैठकों के साथ यह मेला निर्यात उद्योग के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।
भारतीय शिल्प की यह वैश्विक यात्रा परंपरा, नवाचार और आत्मनिर्भरता की कहानी को आगे बढ़ा रही है—और ग्रेटर नोएडा इस ऐतिहासिक समागम का साक्षी बना हुआ है।

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